कर्दम ऋषि की कथा सुन श्रोता हुए मंत्रमुग्ध

फर्रुखाबाद, समृद्धि न्यूज। गंगा नगर में चले रहे 19वें धार्मिक अनुष्ठान के तीसरे दिन की कथा में कथाव्यास आचार्य दाताराम अग्निहोत्री ने कर्दम ऋषि की कथा सुनाई। उन्होंने कहा कि कर्दम ऋषि ब्रह्मा जी के मानस पुत्र थे। ब्रह्मा जी ने उन्हें सृष्टि वृद्धि करने की आज्ञा दी। इसलिए संतान प्राप्ति के लिए कर्दम ऋषि ने कठोरतम तपस्या की। जिससे भगवान विष्णु ने प्रसन्न होकर उन्हे मुन सतरुपा की पुत्र देवहूति से विवाह करने की आज्ञा दी। तो कर्दम ऋषि ने कहा कि मैं विवाह एक शर्त पर करूंगा जब देवहूति के संतान हो जायेगी, तभी मंै गृहस्थ छोडक़र वन चला जाऊंगा। मनु सतरुपा और देवहूति ने इस शर्त को स्वीकार किया और कर्दम ऋषि का विवाह देवहूति से हो गया। फिर उनके नौ कन्यायें हुई। इसके बाद कर्दम ऋषि ने सन्यास लेने की बात कही। तो देवहूति ने उन्हे याद दिलाया कि स्वामी आपने एक पुत्र होने के बाद सन्यास की बात कही थी। इस पर कर्दम ऋषि कन्याओं के विवाह व पुत्र प्राप्ती के चक्कर में पुन: गृहस्थ में उलक्ष गये। फिर उनके कपिल नामक पुत्र का जन्म हुआ। मानस वक्ता डा0 रामबाबू पाठक ने भरत चरित की कथा सुनाई। संचालन महेश पाल सिंह उपकारी ने किया। इस अवसर पर अमित बाजपेयी, अवधेश पाण्डेय, विभोर सोमवंशी, निर्दोष शुक्ल, सर्वेश अवस्थी, ऋषि पाल सिंह, अखिलेश त्रिवेदी, अरविन्द चौहान, उमेश मिश्रा, मनोज अग्निहोत्री आदि लोग मौजूद रहे।

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