फर्रुखाबाद, समृद्धि न्यूज। भारतीय नवजागरण के पुरोधा प्रखर राष्ट्र चिंतक संत आर्य समाज के संस्थापक महर्षि दयानंद सरस्वती के 201वें जन्म दिवस को जनपद की सभी आर्य समाजों में धूमधाम से मनाया गया। गुरु विरजानंद आर्ष गुरुकुल भोलेपुर में ब्रह्मचारियों द्वारा यज्ञ किया गया। आचार्य संदीप आर्य ने यज्ञ संपन्न कराया। उन्होंने कहा महर्षि दयानंद सरस्वती भारतीय संत परम्परा के ऐसे दैदीप्यमान नक्षत्र थे। जिन्होंने धर्म के नाम पर चल रहे अंध विस्वास, पाखण्ड और आडम्बरों से ग्रसित जनमानस को वेद का मार्ग दिखाया। उन्होंने हमें बताया कि वेद ईश्वरीय वाणी है जो परमात्मा ने सभी मनुष्यों के कल्याण के लिए प्रदान की है। वेदों की अवज्ञा करने के कारण ही समाज मे अविद्या अंधकार और अनाचार बढ़ता जा रहा है, इसलिए सुखमय जीवन जीने के लिए उन्होंने वेदों की ओर लौटो का नारा दिया। स्वामी दयानंद स्त्री शिक्षा के प्रवल समर्थक थे। उस समय कुछ लोगों ने स्त्री शिक्षा पर रोक लगा दी थी, ऐसे समय में उन्होंने वैदिक कालीन विदुषी नारियों के उदाहरण देकर सभी को निरुत्तर कर नारी शिक्षा का मार्ग प्रसस्त किया तथा कन्याओं को वेडवेदांग की शिक्षा हेतु अपनी प्रेरणा से अनेकों कन्या गुरुकुल खुल वाये जो आज भी आर्य समाज द्वारा संचालित होकर मातृशक्ति का गौरव बढ़ा रहे हैं। उन्होंने बाल विवाह जैसी कुप्रथा को रुकवा कर तथा विधवा पुनर्विवाह प्रारम्भ कराकर नारियों की दयनीय स्थिति में सुधार कर नारी जाति पर उपकार किया। आचार्य चन्द्रेव शास्त्री ने कायमगंज क्षेत्र के ग्राम दारापुर में आर्य समाज के तत्वावधान में ऋषि जन्मोत्सव सम्पन्न कराया। उन्होंने कहा कि स्वामी दयानंद ने वेदों में वर्णित एकेश्वरवाद से समाज को जोडक़र जड़ जडि़त पाषाण पूजा त्यागने का संकल्प कराया। मंत्री डा0 शिवराम सिंह आर्य ने आर्य समाज नबावगंज में क्षेत्रीय आर्यजनों की उपस्थिति में ऋषि जन्मोत्सव पर्व मनाया। इस मौके पर आचार्य रामप्रकाश, आचार्य ओमदेव शास्त्री, हरिओम शास्त्री, ब्रह्मचारी हर्ष आर्य, सुरेंद्र सिंह आर्य, सुरेश चंद्र आर्य, प्रशांत आर्य, उत्कर्ष आर्य, रमेश चंद्र, घनश्याम आर्य, उदिता आर्या, रितु आर्या आदि लोग मौजूद रहे।
महर्षि दयानंद सरस्वती की 201वें जन्मदिवस पर हुआ यज्ञ
