ध्यान, शान्तिपाठ व प्रवचन की त्रिवेणी में लगाये श्रद्धालुओं ने गोते
फर्रुखाबाद, समृद्धि न्यूज। महात्मा रामचंद्र जी महाराज के सालाना जलसे में दूसरे दिन उनके अनुयायियों की भारी भीड़ उमड़ी। बड़ी तादात में देेेश भर से आये हजारों श्रद्धालुओं ने समाधि पर आन्तरिक अभ्यास व शान्तिपाठ कर सजदा किया। नक्शबंदियों के सूफियाना ज्ञान की खुशबू से महात्मा रामचंद्र की समाधि महक रही है।
फतेहगढ़ के नवदिया क्षेत्र में चल रहे महात्मा रामचंद्र के सौ वें सालाना जलसे में लोग महात्मा जी के बताये सूत्र के अनुसार निरंकार ब्रह्म से जुडऩे के लिए शान्तिपाठ करते नजर आये। यहां हर कोई महात्मा जी की याद में डूबकर रुहानी ताकत से जोडऩे के लिए साधना कर रहा है। यहां आने वालों के बीच मजहब या धर्म जाति की कोई दीवार नहीं हैे।
उनकी सिर्फ एक ही पहचान है सिर पर सफेद टोपी और माथे तक पल्लू डाले महिलाएं और संगमरमर से बने समाधि स्थल पर ध्यान में बैठे लोग। सबका सिर्फ एक ही लक्ष्य है कि रुहानी ताकत से खुद को जोडऩा। किसी से नजर मिली भी तो खामोशी से अभिवादन के बाद फिर तसव्वुफ के समंदर में गोता लगा दिया। यह नजारा नक्सबंदिया सिलसिले के अंतिम गुरु महात्मा रामचंद्र जी महाराज की समाधि पर चल रहे जलसे में नजर आया। सूफी संत विनय सक्सेना ने महात्मा रामचंद्र की साधना पद्धति पर प्रकाश डाला कहा कि निरंकार ब्रह्म से जुडक़र ही जीवन का उद्देश्य प्राप्त किया जा सकता है। भोगांव से आये मौलाना शहनवाज अहमद खाँ ने कहा कि महात्मा जी ने इंसानियत को सबसे बड़ा धर्म बताया और नेकी के रास्ते पर चलने का आह्वान किया। महात्मा जी पर लगी पुस्तक प्रदर्शनी पर लोगों ने खरीददारी की। रामचंद्र के पैतृक निवास तलैया लेन पर भी लोगों ने पहुंचकर श्रद्धासुमन अर्पित किये। रामचंद्र जी की पौत्र वधू माधुरी सक्सेना से भक्तों ने आशीर्वाद हासिल किया।
नक्सबंदियों के सूफियाना ज्ञान की खुशबू से महक रही महात्मा रामचंद्र की समाधि
