फर्रुखाबाद, समृद्धि न्यूज। संस्कार भारती के तत्वाधान में बढ़पुर स्थित उत्सव गेस्ट हाउस में प्रांतीय कला साधक संगम द्वारा हिन्दू परिवार में मातृ शक्ति के योगदान पर संगोष्ठी का आयोजन हुआ। कार्यक्रम में पहुंची पं0 विरजू महाराज कथक संस्थान लखनऊ की उपाध्यक्ष मिथलेश तिवारी, डा0 रजनी सरीन ने विचार व्यक्त किये। मुख्य अतिथि मिथलेश तिवारी ने कहा कि भारतीय नारी की व्याख्या हिन्दू समाज जिसमें संयुक्त संस्कारों की जननी है, धर्म, कर्म, सभ्यता के दैवीय दर्शन होते है। वर्तमान समय में हमारी प्राचीन सभ्यता को पश्चिमी लोग नष्ट करने में लगे है। हमें उनसे सावधान रहना है और समाज में हर एक के जीवन में तनाव है उसे मुक्त करना है। हमें अपनी रहन, सहन, खान-पान, वेषभूषा, संस्कारवान, अध्यात्म व भारतीय दर्शन में समरसता बनाये रखना है और बच्चों को संस्कारवान बनाना है। मातृ शक्ति के नाते हमें भी इस दायित्व का निर्वाह्न करना चाहिए। डा0 रजनी सरीन ने कहा कि भारतीयता पर हमें गर्व है। समाज की सैकड़ों महिलाओं ने कार्यक्रम में भाग लिया और भारतीय संस्कृति और परिवार व समाज तथा राष्ट्र में कार्य करने का संकल्प लिया। इस अवसर पर पूनम पाण्डेय, आकांक्षा सक्सेना, सुमन राठौर, प्रीती तिवारी, रजनी लौगानी, सीमा गुप्ता, सुनीता सक्सेना, संध्या राजपूत, रमा पाण्डेय, इंदू शुक्ला, वर्षा कश्यप, नेहा श्रीवास्तव, अंजू चौहान, सिमरन सिंधी, रंजना झा, बंधना मिश्रा, साधना श्रीवास्तव, अर्चना द्विवेदी, पूनम पाण्डेय, कविता शुक्ला, शिवांगी, अंजू आदि लोग मौजूद रहे। सभी को स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया।
भारतीय नारी संयुक्त संस्कारों की जननी है: मिथलेश तिवारी
