- - चांद नज़र आते ही तरावीह और रोज़ो की शुरूआत हो जायेंगी –
- – मुस्लिम समुदाय बेसब्री से रमज़ान के आगमन का इंतजार कर रहे।
समधन, समृद्धि न्यूज़। रमजान का महीना आने वाला है बड़ी बरकतों वाला यह महीना होता हैं और खूब सदका, खैरात करने का होता हैं ज्यादा से ज्यादा अपने खालिक और मालिक को याद करने के होता हैं दिन के अंदर अपने रब के नाम पर भूखा और प्यास रहकर इबादत का रोजा रखा जाता है और हर तरह के बुरे कामों से बचा जाता है इसी तरीके से रात में भी खूब अल्लाह को याद किया जाता है और इस महीने के अंदर जहां दिन में रोजा रखा जाता है रात में इस महीने की अहम इबादत तरावीह की नमाज भी अदा की जाती है जिसके अंदर 20 रकाते होती हैं और उनकी रकातों में कुराने पाक पढ़ा और सुना जाता है

कम से कम एक कुरान ए पाक तो आम तौर पर पूरा ही किया जाता है लेकिन जिन लोगों को अल्लाह ताला तौफीक देता है तो वह एक से ज्यादा भी सुनते हैं और पूरे महीने तरावीह की नमाज की पाबंदी से अदाएगी करते हैं।
यह बातें मंगलवार को समधन नगर में मुफ्ती रिजवान ने फहीम शेख संवाददाता को बताई उन्होंने कहा कि यह महीना पहली तारीख से लेकर आखिरी तारीख तक बड़े ही इबादत में लगाव के साथ गुजारना जरूरी होता है ऐसा नहीं होता है की शुरू में इबादत करले कुछ दिन और फिर छुट्टी हो जाए बल्कि इसका एक एक दिन बहुत ही ज्यादा इबादत का होता है पहले 10 दिन और दूसरे 10 दिन और फिर आखरी 10 दिन जितना आगे बढ़ते जाते हैं उतना ही ज्यादा आदमी के नेकियां में इजाफा होता है और इंसान को और ज्यादा खुदा की याद में और उसके हुकुम को पूरा करने में ज्यादा तवज्जोह देने की जरूरत होती है
रोजा रखना हर मर्द और औरत जो 15 साल के करीब बालिग हो जाते हैं वहां से लेकर बड़ी उम्र तक के तमाम लोगों पर मर्द हो या औरत उनके ऊपर रोजा रखना फर्ज और जरूरी होता है इसलिए लोगों पर जरूरी और फर्ज है कि इस महीने के अंदर रोजे की अदायगी करें और जिनको अल्लाह ने नवाजा है चाहे कम हो या ज्यादा माल हो हर हर शख्स को ज्यादा से ज्यादा गरीबों पर सदका व खैरात करना चाहिए नेक कामों के अंदर अपने माल को खुदा की राह में देना चाहिए और हर शख्स हर बुरे काम से बचे लड़ाई झगड़ों से बुरी बातों से गाली गलौज से एक दूसरे को तकलीफ पहुंचाने से इस महीने के अंदर और ज्यादा बचना जरूरी होता है अपनी परेशानी दुआओं के अंदर बयान करें और परेशानियों को दूर करने की दुआ खूब ज्यादा से ज्यादा करें कुरान की तिलावत खूब करें एक कुरान तो जरूर पूरा करें।
