भरत मिलाप में मुस्लिम समाज ने बरसाए फूल

कमाल शाह बाबा की मजार से दिखा सांप्रदायिक सौहार्द
हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं ने देखा राम भरत का मिलन
कमालगंज, समृद्धि न्यूज। रविवार रात आयोजित भरत मिलाप समारोह में हिन्दू-मुस्लिम एकता का अद्भुत नजारा देखने को मिला। इस दौरान मुस्लिम समाज के लोगों ने कमाल शाह बाबा की मजार के पास से भगवान राम और भरत के स्वरूपों पर पुष्प वर्षा की। यह आयोजन कानपुर-फतेहगढ़ मार्ग स्थित चौराहे पर हुआ। जहां हजारों की संख्या में श्रद्धालु मौजूद थे। रात करीब बारह बजे शुभ घड़ी में भगवान राम, माता जानकी और लक्ष्मण एक ओर से धीरे-धीरे आगे बढ़े। दूसरी ओर से अनुज भरत और शत्रुघ्न जिन्हें प्रभुराम जी के आने की खबर हनुमान और अंगद जी देने गये थे। कोहनी व सीने के बल आगे बढ़ते हुए मिलन के लिए व्याकुल दिखे। चारों भाइयों के मंच पर पहुंचते ही वे एक.दूसरे को गले लगाने दौड़ पड़े। जिससे वहां मौजूद सभी की आंखें नम हो गईं। मिलन के बाद वनवासी वस्त्र उतारकर भगवान के स्वरूपों को राजसी वस्त्र पहनाए गए। इसके बाद आरती उतारी गई और भोग लगाया गया। घंटा-घडिय़ाल और शंख ध्वनि के साथ जय श्रीराम के जयघोष से पूरा वातावरण गूंज उठा। सडक़ के दोनों ओर उमड़ी भारी भीड़ ने हाथ उठाकर भगवान के जयकारे लगाए। मुस्लिम समाज की ओर से कमाल बाबा की मजार के पास से भरत और शत्रुघन के स्वरूपों पर पुष्पवर्षा की गई। इस अवसर पर उर्स कमेटी के हबीब अहमद, इस्लाम अहमद, सफाहत हुसैन, हनीफ कुरेशी और शकील सहित कई सदस्य मौजूद रहे। इस भव्य आयोजन में कमेटी संरक्षक केशव चंद्र गुप्ता, मदन माहेश्वरी, अध्यक्ष अजय माहेश्वरी, शिवकुमार गोयल, संजय गुप्ता, सुल्ले गुप्ता, पवन गुप्ता, सौरभ चौरसिया, मनोज हलवाई और गोपाल पालीवाल सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। लीला विराम के बाद मनमोहक झांकियों का प्रदर्शन किया गया और रेलवे तिराहे पर भी सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित हुए। तरुण माहेश्वरी, मनोज महाजन, पवन माहेश्वरी और छोटेलाल गुप्ता के यहां स्वरूपों का पूजन भी किया गया। पूरे कस्बे को भव्य रूप से सजाया गया था। वहीं भरत मिलाप के बाद दूरदराज गांवों से आये लोग इधर उधर भटकते रहे, क्योंकि रामलीला कमेटी द्वारा ऐसा कोई कार्यक्रम संचालित नहीं करवाया गया था। जिसमें लोग अपना समय व्यतीत कर सकें। पूर्व के वर्षों में जगह-जगह रासलीला, आर्केस्ट्रा व अन्य कार्यक्रम होते थे जो विगत 2 वर्ष से रामलीला कमेटी पर अपना-अपना वर्चस्व कायम करने के कारण बंद हैं। जिसका खामियाजा रामलीला को भुगतना पड़ रहा है। जिसके कारण दिन पर दिन रामलीला कार्यक्रम में जनता की दिलचस्पी कम होना एवं भीड़ का निरंतर घटना दर्शाता है।

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