पुलिस भर्ती में सामान्य वर्ग के साथ भेदभावपूर्ण नीति क्यों: नंदकिशोर

फर्रुखाबाद, समृद्धि न्यूज। समाजवादी पार्टी के पूर्व महानगर उपाध्यक्ष व ब्राह्मण समाज के पूर्व प्रदेश प्रभारी नन्दकिशोर दुबे वन्देमातरम ने एक विज्ञिप्ति जारी कर कहा कि उत्तर प्रदेश में पुलिस की भर्ती होने जा रही है। जिसमें सामान्य वर्ग के प्रति जो भेदभावपूर्ण नीति अपनाई जा रही है उससे मैं व सामान्य वर्ग के लोग बहुत आहत हैं और उत्तर प्रदेश सरकार के इस फैसले की मैं घोर निंदा करता हूँ। जब कोविड में हर किसी के तीन साल बर्बाद हुए हैं, तो सामान्य वर्ग के लोगों को आयु सीमा में छूट क्यों नहीं दी जा रही। सामान्य वर्ग के पुरुषों के लिए उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती में आयु सीमा 18 से 22 वर्ष के बीच निर्धारित की गयी है, जबकि ओबीसी, एससीएसटी पुरुषों के लिए आयु सीमा 18 से 28 वर्ष कर आयु में छूट दी गई है। सामान्य वर्ग की महिलाओं के लिए यह 18 से 25 वर्ष के बीच हैए, जबकि ओबीसी, एससीएसटी महिलाओं के लिए 6 वर्ष की छूट देकर यह 18 से 31 वर्ष की गई है। कॉन्स्टेबिल भर्ती में तो सामान्य, निर्धन घर के ही बच्चे जा रहे हैं भले ही वो ब्राह्मण, ठाकुर, कायस्थ क्यों न हों उनसे इतना भेदभाव क्यों। नन्दकिशोर दुबे ने कहा कि सबका साथ सबका विकास का नारा देने वाली डबल ईंजन की भाजपा सरकार को कम से कम सामान्य वर्ग की महिलाओं से तो भेदभाव नहीं करना चाहिए था। सामान्य वर्ग की आयु सीमा में संशोधन करके सभी बच्चों को एक समान दर्जा दिया जायें!

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