फर्रुखाबाद, समृद्धि न्यूज। आंतरिक अभ्यास एवं शांतिपाठ के साथ सूफी संत महात्मा रामचंद्र के अनुयायियों का तीन दिवसीय सालाना जलसा रविवार को सम्पन्न होगा। श्रद्धालुओं ने विदा होते समय महात्मा रामचंद्र की पौत्र वधू माधुरी सक्सेना एवं प्रपौत्र सूफी सन्त विनय सक्सेना से आशीर्वाद लिया तथा अगले वर्ष भंडारे में आने का संकल्प लिया। तीन दिवसीय सौ वें जलसे में प्रात: आंतरिक अभ्यास एवं शांतिपाठ में श्रद्धालुओं ने हिस्सा लिया। महात्मा जी की पौत्र वधू माधुरी सक्सेना एवं प्रपौत्र विनय सक्सेना से सूफी रीतिरिवाज सेेे उनका आशीर्वाद लेकर श्रद्धालुओं ने भावपूर्ण विदाई ली। विदाई के वक्त श्रद्धालु राजीव भगौलीवाल ने महात्मा जी की शान में पढ़ा-तेरे दामने करम का जिसे मिल गया सहारा, हर एक मौज तूफा खुद बन गयी किनारा।
पीडि़तों से रामचंद्र के मिशन में कायम श्रद्धा और विश्वास जलसे में लाता है खींच
महात्मा रामचंद्र जी के अनुयायियों का विश्वास है कि समाधि पर पहुंचते ही रुहानी ताकत एवं शांति का संचार होता है। परिवारों में पीढिय़ों से रामचंद्र जी के मिशन में श्रद्धा और विश्वास कायम है। जो उन्हें यहां खींच लाता है। दिल्ली से नवनीत गोयल यहां २० वर्षों से माथा टेंकने आ रहे हैं। उनका माता पिता भी लालाजी महाराज के मिशन से जुड़े रहे। लखनऊ के सुरेश चौहान भी बचपन से समाधि से जुड़े हैं और निरंतर खिराजे अकीदत पेश करनेेे आते रहते हैं। उनका कहना है कि महात्मा जी का स्मरण करने से बिगड़े काम बनते हैं। ग्वालियर के राजकुमार श्रीवास्तव एवं शाहजहांपुर के नृपेश गुप्ता पिछले १५ वर्षों से रामचंद्र के जलसे में शिरकत करने आ रहे हैं। उनका कहना है कि समाधि पर पहुंचते ही शक्ति का ऐसा संचार होता है जिसे महसूस कर सकते हैं व्यक्त नहीं।
