यूपी के चार सरकारी मेडिकल कॉलेजों में नीट-2025 के दाखिले रद्द, एससी-एसटी को 23 की जगह दे दिया 78 फीसदी आरक्षण

समृद्धि न्यूज। इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने अंबेडकरनगर, कन्नौज, जालौन व सहारनपुर के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में नीट-2025 के तहत हुए दाखिले रद्द कर दिए। इन कॉलेजों में आरक्षित वर्ग के लिए 79 प्रतिशत से अधिक सीटें थीं। न्यायालय ने कहा कि राज्य सरकार का विशेष आरक्षण शासनादेश आरक्षण अधिनियम 2006 के विरुद्ध है।
राजकीय मेडिकल कॉलेज कन्नौज, अंबेडकरनगर, जालौन और सहारनपुर में एमबीबीएस के दाखिलों में अनुसूचित जाति एवं जनजाति को 23 के बजाय 78 फीसदी आरक्षण दे दिया गया। वहीं अति पिछड़े वर्ग को 13 फीसदी और सामान्य का हिस्सा सिर्फ नौ फीसदी जबकि आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) का कोटा लागू ही नहीं किया। ऐसे में हाईकोर्ट ने नीट 2025 की काउंसिलिंग रद्द करने का आदेश दिया है। हालांकि अब चिकित्सा शिक्षा विभाग दोबारा अपील की तैयारी में जुटा है। प्रदेश में अनुसूचित जाति को 21, अनुसूचित जनजाति को 2, अन्य पिछड़ा वर्ग को 27 और ईडब्ल्यूएस को 10 फीसदी आरक्षण देने की व्यवस्था है। मेडिकल कॉलेजों का निर्माण अलग-अलग समय पर हुआ है। कन्नौज, अंबेडकरनगर, जालौन और सहारनपुर स्थित मेडिकल कॉलेज के निर्माण के वक्त समाज कल्याण विभाग की ओर से विशेष घटक के तहत 70 फीसदी बजट दिया गया। जबकि 30 फीसदी बजट सामान्य था। यह निर्णय न्यायमूर्ति पंकज भाटिया की एकल पीठ ने नीट अभ्यर्थी साबरा अहमद की याचिका पर पारित किया है। याची की ओर से अधिवक्ता मोतीलाल यादव ने दलील दी कि याची ने नीट-2025 की परीक्षा दी है, जिसमें उसे 523 अंक मिले और उसकी आल इंडिया रैंक 29,061 रही। कहा गया कि शासनादेशों 20 जनवरी 2010, 21 फरवरी 2011, 13 जुलाई 2011, 19 जुलाई 2012, 17 जुलाई 2013 व 13 जून 2015 के जरिये इन मेडिकल कॉलेजों में आरक्षण की सीमा बढ़ाकर 79 प्रतिशत से ज्यादा कर दी गई जो स्पष्ट तौर पर 50 प्रतिशत की सीमा से अधिक आरक्षण न होने संबंधी स्थापित सिद्धांत के विपरीत है।
हाईकोर्ट में दाखिल की गई याचिका में बताया गया कि इन कॉलेजों में दाखिला लेने वाले छात्रों को हॉस्टल में अनुसूचित जाति एवं जनजाति के बच्चों को 70 फीसदी आरक्षण देना था, लेकिन विभागीय अधिकारियों की लापरवाही से इसकी गलत व्याख्या कर दी गई। इसके बाद एमबीबीएस के दाखिलों में अनुसूचित जाति और जनजाति को 23 फीसदी आरक्षण देने की जगह 78 फीसदी आरक्षण दे दिया गया। यह व्यवस्था कई साल से चल रही है। इस वर्ष की काउंसिलिंग में भी इसी व्यवस्था के तहत सीटें आवंटित की गई हैं। ऐसे में हाईकोर्ट ने काउंसिलिंग को ही रद्द कर दिया है।

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