औरैया। एनआईए व ईडी ने बुधवार रात को औरैया में पेट्रोल पंप और नैना इलेक्ट्रॉनिक के मालिक कमल वर्मा के आवास पर छापे मारे। यह कार्रवाई गोपनीय तरीके से की गई, जिसमें 15 टीमें शामिल थीं। पुलिस बल की भारी तैनाती के बीच दस्तावेजों को खंगाला गया।
प्रवर्तन निदेशालय ईडी (ईडी) व एनआइए (राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण) की संयुक्त टीम ने शहर के नामचीन असलहा सप्लायर सर्राफ के ठिकानों पर बुधवार देर रात करीब डेढ़ बजे छापेमारी की। पुलिस की लगभग १५ गाडियों के साथ पहुंची आठ से अधिक कारों ने निझाई मोहल्ला जिला अस्पताल रोड किनारे नायारा पेट्रोल पंप, चार घरों, सराफा बाजार में गन हाउस व दुकानों पर डेरा डाल दिया। गुरुवार सुबह टीम की जांच रही। करीब छह महीने पहले छत्तीसगढ़ में तीन हजार से अधिक कारतूस औरैया निवासी लाला शर्मा से बरामद हुए थे। वहीं, 17 दिसंबर 1995 को बंगाल के पुरुलिया जिले में विमान से भारी मात्रा में हथियारों के गिराए जाने की घटना में कारोबारी के पिता को संदेह के घेरे में लिया गया था। तत्कालीन एसपी संजय सिंघल के सामने पिता ने सायनाइड खाकर सुसाइड कर लिया था। यह घटना उस समय शहर में लंबे समय तक चर्चा का विषय रही और परिवार के इतिहास में गहरी छाप छोड़ गई। कार्रवाई के दौरान जांच एजेंसी नोट गिनने की एक मशीन और इलेक्ट्रिक कटर साथ ले गई। दिन में करीब 11 बजे एक और नोट गिनने की मशीन एसबीआई के कर्मचारी लेकर पहुंचे। रसूख कमल वर्मा परिवार में तीन भाई हैं। सबसे बड़े रविकांत वर्मा उर्फ लाले सराफा कारोबार से जुड़े हैं और उनकी सोने चांदी की दुकान है। दूसरे भाई शशिकांत वर्मा उर्फ शशि भी सराफा ट्रेड में सक्रिय हैं और उनका अलग कारोबार चलता है। वर्मा परिवार कई दशकों से सराफा बाजार में सक्रिय रहा है, जिससे उनकी व्यवसायिक पकड़ मजबूत मानी जाती है। दोनों भाइयों के विपरीत कमलकांत वर्मा ने अलग दिशा में व्यापार चुना और रुहाई मोहल्ला स्थित पेट्रोल पंप का संचालन शुरू किया। यही पेट्रोल पंप और उनके घर में एनआईए के गुरुवार को चली ताबड़तोड़ छापेमारी के दौरान सबसे ज्यादा चर्चा में रहा। संयुक्त टीमों ने पेट्रोल पंप से लेकर आवास और अन्य प्रतिष्ठानों तक घंटों तलाशी ली। एनआईए की जांच अब इस बात पर भी केंद्रित है कि परिवार के पुराने संपर्क, कर्मचारियों का नेटवर्क और व्यापारिक गतिविधियों में कहीं कोई कड़ी उस केस से तो नहीं जुड़ती। बिहार के कैमूर जिले में 3700 जिंदा कारतूस की बरामदगी का मामला। इस केस में पकड़ा गया शत्रुघ्न शर्मा उर्फ लाला शर्मा कमलकांत का कर्मचारी था। जिसके बयान के बाद वर्मा परिवार एनआईए की रडार पर आया। बताया गया कि रविकांत वर्मा उर्फ लाले व्यापार मंडल कंछल गुट के जिलाध्यक्ष हैं और प्रांतीय नेता हैं। तीसरा भाई अजयकांत शशि वर्मा है। इनके पिता महेश वर्मा ने सराफा बाजार से कारोबार शुरू किया था। छोटी सी ज्वैलर्स की दुकान थी और गन हाउस था। पेट्रोल बसों का संचालन भी औरैया, कन्नौज, इटावा रूट पर करते थे। कारोबार चमकने के साथ ही उन्होंने कम समय में बड़े कारोबारियों, उद्यमियों में अपना नाम शामिल कर लिया। पुरुलिया आम्र्स ड्राप केस में सैकड़ों एके-47 राइफलें, हजारों गोला-बारूद गिराए गए थे। मामला आनंद मार्ग पंथ को कम्युनिस्ट विरोधी विद्रोह शुरू करने में मदद करने के लिए था। सुरक्षा एजेंसियों ने जांच की और शस्त्रों की तस्करी में संदेह पर महेश वर्मा को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया था। कोई राज न खुले, इस वजह से तत्कालीन एसपी के सामने खुदकुशी कर ली थी। उनके तीनों बेटों में कमल व लाले कहीं न कहीं पुश्तैनी कामों को बढ़ाते रहे। जिले के अलावा दूसरे प्रांतों में उनका कारोबार फैला है। छत्तीसगढ़ में कारतूसों का जखीरा पकड़े जाने के बाद फिर से पुरुलिया आम्र्स ड्राप केस का जिन्न बाहर आया है। । राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण टीम ठिकानों पर छापेमारी करते हुए दस्तावेजों को जुटे। जिससे मोहल्ले व आसपास के क्षेत्र में हडक़ंप मचा रहा।
औरैया: शस्त्र कारोबारी रहे कमल वर्मा के आवास और दफ्तर पर एनआईए व ईडी की छापेमारी
