हरदोई से संतोष तिवारी की रिपोर्ट
हरदोई, समृद्धि न्यूज। ब्लॉक टोडरपुर की ग्राम पंचायत जमुरा में मनरेगा योजना को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि ग्राम पंचायत में पिछले पाँच वर्षों के दौरान विकास कार्य लगभग ठप रहे, जबकि योजनाओं के नाम पर करोड़ों रुपये का बजट जारी हुआ। ग्रामीणों का कहना है कि बड़े पैमाने पर अनियमितताएँ और कागजों पर ही विकास दिखाकर जिम्मेदारों ने योजनाओं का लाभ स्वयं उठा लिया।
जमुरा ग्राम पंचायत,जहाँ लगभग 7 हजार मतदाता निवास करते हैं,वहां के लोगों का दावा है कि पंचायत के जिम्मेदारों की मिलीभगत से योजनाओं का क्रियान्वयन कागजों तक ही सीमित रहा। मनरेगा के तहत होने वाले कार्य—जैसे खड़ंजा निर्माण,तालाब खोदाई, नाली निर्माण,वृक्षारोपण,साफ-सफाई और श्रमिकों को प्रदान होने वाली मजदूरी—इनमें बड़े पैमाने पर अनियमितता होने की चर्चा है। ग्रामीणों का कहना है कि कई कार्यों का भुगतान तो हुआ,लेकिन जमीन पर उनका अस्तित्व ही नहीं है।
ग्रामीणों का आरोप है कि जिन विकास परियोजनाओं पर लाखों रुपये खर्च होना दिखाया गया, वे या तो अधूरे हैं या बिल्कुल शुरू भी नहीं हुए। पंचायत में सड़क,नाली,जल निकासी,सार्वजनिक सुविधा भवन, सामुदायिक स्थल या स्कूल परिसर सुधार जैसे बुनियादी कार्य भी लंबे समय से अधर में लटके हुए हैं। इससे युवाओं,महिलाओं और बुजुर्गों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
ग्रामीणों ने बताया कि मनरेगा सूची में कई ऐसे नाम दर्ज किए गए,जिन लोगों ने कभी एक दिन भी मजदूरी नहीं की। इसके बावजूद उनके नाम पर भुगतान होना बताया गया है। कई लोग तो ऐसे भी हैं जिन्हें यह भी पता नहीं कि उनके नाम से योजना के तहत कोई काम दर्ज है। इससे ग्रामीणों में रोष लगातार बढ़ रहा है।
पंचायत के विकास कार्यों में ठहराव के कारण जनता में यह सवाल भी उठ रहा है कि आखिर पंचायत में आए हुए बजट का सही उपयोग कहाँ हुआ। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि जिम्मेदारों ने अपने अधिकारों का दुरुपयोग करते हुए योजनाओं को निजी लाभ का साधन बना लिया। ग्रामीणों का कहना है कि कुछ लोगों ने इस दौरान अपनी आर्थिक स्थिति में असामान्य रूप से वृद्धि की, जिससे संदेह और गहरा गया है। हालांकि ग्रामीण यह भी कहते हैं कि इन मामलों की निष्पक्ष जांच से ही सच सामने आ पाएगा।
स्थानीय लोगों ने जिला प्रशासन और ब्लॉक स्तर के अधिकारियों से वित्तीय और भौतिक सत्यापन की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि जब पंचायत में विकास कार्य शून्य हैं, तो करोड़ों की धनराशि का हिसाब सार्वजनिक रूप से स्पष्ट होना चाहिए। कई लोग इस संबंध में शिकायतें भी दर्ज कराने की तैयारी कर रहे हैं ताकि पूरे प्रकरण की पड़ताल उच्च स्तर पर हो सके।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही जांच शुरू नहीं हुई,तो वे बड़े स्तर पर प्रदर्शन करेंगे। उनकी मांग है कि मनरेगा और अन्य विकास योजनाओं की धनराशि का विवरण सार्वजनिक किया जाए तथा जिम्मेदारों पर कार्रवाई की जाए।
फिलहाल,ग्रामीणों की बढ़ती नाराज़गी और पंचायत पर लगे आरोपों ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा कर दिया है। अब देखने वाली बात यह होगी कि क्या प्रशासन मामले का संज्ञान लेकर जांच कराता है या फिर यह मुद्दा भी कागजों में ही सिमटकर रह जाएगा।
