फर्रुखाबाद, समृद्धि न्यूज। शहर के मोहल्ला खैराती खां स्थित महल वाली मस्जिद (मस्जिद ए-कुबा) में 27 रोजे की 28 तरावीह में कुरआन पाक का दौर मुकम्मल हुआ। इस दौरान मस्जिद को रंग-बिरंगी झालरों से सजाया गया। नमाज तरावीह के बाद शहर की जामा मस्जिद के पेश इमाम काजी-ए शहर मुफ्ती मोअज्जम अली ने मुल्क में अमन चैन की दुआ की तथा आपसी भाईचारे की दुआ कराई।
मोहल्ला खैराती खां स्थित महल वाली मस्जिद (मस्जिद ए-कुबा) में 27 रोजे की 28वीं तरावीह की नमाज में हाफिज नाजिम ने कुरआन-ए-पाक का दौर मुकम्मल किया और बाद नमाज तरावीह दुआ के पहले मस्जिद के खतीबो इमाम मौलाना शाहिद ने रमजान की। फजीलत बयान करते हुये कहा कि कुरआन शरीफ का सुनना, पडऩा और आंखों से देखना भी सबाव है। रमजान शरीफ में इबादत करने में सवाब और ज्यादा बड़ जाता है।
इसके बाद काजी-ए शहर मुफ्ती मोअज्जम अली ने अपने बयान में कहा कि इंसान, तभी कामयाब होता है, जब वह अपने दीन पर मजबूती से साबित कदम रहे। दीन पर यकीन रखे। अल्लाह ने इंसान को पैदा किया है। इंसान को अल्लाह की इबादत करनी चाहिए। अल्लाह पर अपना पुख्ता ईमान रखें। दीन पर चलने के लिए ईमान की मजबूती जरूरी है। ईमान तब मजबूत रहेगा। जब इंसान नेक अमल करे। अमल में रोजा नमाज हज जकात आदि हैं। इंसान मुजाहिदा करे। इससे उसकी आखिरत सुधरेगी। उन्होंने कहा कि इंसान दीन को अपनी जिंदगी का हिस्सा बनाना चाहिए। इस्लाम एक अच्छा मजहब है, लेकिन जब मुसलमान अच्छा अमल करेगा, तभी दुनिया देखेगी कि इस्लाम कैसा है।
उन्होंने कहा कि माहे रमजान में हर एक नेकी का सवाब 70 गुनाह मिलता है और नफिल नमाज का सवाब फर्ज के बराबर और फर्ज नमाज का सवाब 70 गुनाह बड़ जाता है। उन्होने कहा कि तरावीह में कुरआन का दौर मुकम्मल हुआ है, लेकिन तरावीह की नमाज नहीं खत्म हुई है। ईद का चांद देखने के बाद ही तरावीह मुकम्मल होगी। इसीलिये लोग यह न समझे कि आज से तरावीह खत्म हो गई और तरावीह की नमाज पडऩा छोड़ दें।
इस मौके पर रेलवे रोड स्थित इमली वाली मस्जिद के खतीब-ओ इमाम अब्दुल्ला जावेद, सचिव अख्तर हुसैन, खजांची-अब्दुल माजिद उर्फ चंदा मिस्त्री, निसार-कुरैशी, हाजी राजा शमसी, हाजी अहमद अंसारी, असलम अंसारी सभासद, शादाब खांन, जुबैर खांन, अख्तर हुसैन, लाल मियां, मिस्त्री, शाहिद नवाज, अजहर सिद्दीकी, मोहम्मद उस्मान, चांद मियां आदि लोग मौजूद रहे।
जब मुसलमान नेकी पर अमल करेगा, तभी दुनिया देखेगी कि इस्लाम कैसा है: मुफ्ती मोअज्जम अली
