फर्जी जमानतगीर के विरुद्ध मुकदमे के आदेश

कोर्ट सख्त, इस षड्यंत्र में चाहें अधिवक्ता क्यों न हो सब पर हो कार्यवाही
जांच में खतौनी व तहसीलदार की मोहर सत्यापन भी फर्जी
फर्रुखाबाद, समृद्धि न्यूज।
लूट जैसे गंभीर मामले में कूटचरित दस्तावेज तैयार कर जमानत लेने वाले जामिनदार के विरुद्ध मुकदमा दर्ज कर व इस षड्यंत्र में कौन-कौन लोग शामिल हैं, उनके विरुद्ध कार्रवाई करने का आदेश विशेष न्यायाधीश दस्यु प्रभावित क्षेत्र कृष्ण कुमार ने दिया है।
जामिनदार विजय कुमार पुत्र रामचंद्र निवासी आजाद नगर थाना कमालगंज ने लूट के अभियुक्त बिल्लू उर्फ तौफीक अहमद की जमानत ली थी। इसी मामले में क्षेत्रीय लेखपाल द्वारा ग्राम मोहनपुर दीनारपुर में जाकर जांच की तो ग्राम वासियों ने बताया और अपने बयान अंकित कराये कि जामिनदार विजय कुमार इस ग्राम में कभी भी निवास नहीं करता था और न ही उसकी पूर्व में कोई जमीन है। विजय नाम के व्यक्ति को वह लोग पहचानते भी नहीं है। ग्राम वासियों द्वारा दिए गए बयान व लेखपाल की जांच आख्या संलग्न है। प्रभारी रजिस्टर कानून गो विवेक पांडे सदर तहसील द्वारा पेश की गई। साथ में जमानतनामा की छाया प्रति जो की 21 अप्रैल 2003 के संदर्भ में जमानत सत्यापन रिपोर्ट में अंकित हस्ताक्षर व लेखपाल/राजस्व निरीक्षक तत्कालीन तहसीलदार के हस्ताक्षर प्रमाणीकरण के संदर्भ में आख्या मांगी गई। जिस पर प्रभारी रजिस्टर कानून गो विवेक पांडे ने दी आख्या में दर्शाया कि उस समय मोहनपुर दीनारपुर का चार्ज हरिश्चंद्र के पास था। बिलबुक के आधार पर हरिश्चंद्र की मूल तैनात की खुदागंज में थी। जमीदार की जमानत सत्यापन कि संलग्न छाया प्रति वर्ष 2003 तहसीलदार के हस्ताक्षर बिलबुक पर मेल नहीं खा रहे हैं। खतौनी ग्राम दीनारपुर के नाम से जो न्यायालय में प्रेषित की गई वह राजस्व अभिलेखों में दीनारपुर का नाम दर्ज नहीं है। बल्कि मोहनपुर दीनानपुर कार्यालय में उपस्थित अभिलेख खतौनी में है। खतौनी कूटरचित प्रतीत होती है। तहसीलदार की आख्या से स्पष्ट है कि जमानती विजय कुमार के संबंध में 17 अप्रैल 2003 को जो इंतखाब खतौनी 21 अप्रैल को तहसील सदर की जो रिपोर्ट प्रस्तुत की गई वह कूटचरित व फर्जी है। शपथ पत्र पर जमानत लेने वाले का फोटो भी चस्पा है। जिसे सत्यापित किया गया है। इस मामले में अभियुक्त बिल्लू उर्फ तौफीक अहमद की जमानत किसी अज्ञात व्यक्ति ने तथा साजिश में शामिल अन्य व्यक्तियों द्वारा जमानत स्वीकृत कराई गई थी। अदालत ने पुलिस को आदेश दिया है कि तहसीलदार सदर की आख्या के आधार पर रिपोर्ट दर्ज कर विवेचना करें एवं इस षड्यंत्र में शामिल उन समस्त व्यक्तियों का पता लगाकर उनके विरुद्ध कार्रवाई करें। जिनके द्वारा फर्जी व्यक्तियों के शपथ पत्र पर शपथकर्ता की फर्जी पहचान की गई है और फर्जी तरीके से सत्यापित किए गए हैं। पुलिस अधीक्षक को भी आदेश की प्रति भेजते हुए कहा कि फर्जी जमानतियों व फर्जी आख्याओं के आधार पर जमानत स्वीकृत करने के मामले में विशेष रूप से पर्यवेक्षण करना सुरक्षित करें, ताकि ऐसे प्रकरण में शामिल समस्त दोषी चाहे वह अधिवक्ता क्यों ना हो अथवा शपथ पत्र सत्यापन करने वाले हो उनके विरुद्ध उचित कार्रवाई की जा सके। इस संदर्भ में अग्रिम तिथि 8 फरवरी नियत की गई है।

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