महिला कांस्टेबिल समेत तीन पुलिसकर्मियों के विरुद्ध मुकदमा दर्ज करने का आदेश

फर्रुखाबाद, समृद्धि न्यूज। अधिवक्ता के 173(4) बी.एन.एस.एस. के प्रार्थना पत्र पर विशेष न्यायाधीश दस्यु प्रभावित क्षेत्र/तृतीय अपर सत्र न्यायाधीश शैलेंद्र सचान ने कोतवाली फतेहगढ़ पुलिस को महिला कांस्टेबिल समेत उप निरीक्षक व सुरक्षा प्रभारी के खिलाफ सात दिन के अंदर मुकदमा पंजीकृत कराकर न्यायालय को अवगत कराने का आदेश दिया है।
पुलिस अधीक्षक को भेजे गये ज्ञापन में कहा है कि पीडि़त देवेंद्र सिंह यादव बार एसोसिएशन का संयुक्त सचिव है। दिनांक 02.06.20125 को समय लगभग 9:20 बजे दिन में पीडि़त अधिवक्ता की ड्रेस में कचहरी फतेहगढ़ के गेट नंबर 3 पर जा रहा था। गेट पर मौजूद सुरक्षा कर्मी महिला कांस्टेबिल राखी गौड़, उपनिरीक्षक राजबहादुर सिंह एवं न्यायालय सुरक्षा प्रभारी ए0के0 सिंह ने पीडि़त से आधार कार्ड मांगा, तो पीड़ि़त ने बार एसोसिएशन फतेहगढ़ द्वारा जारी अपना पहचान पत्र दिखाया, तो उपरोक्त पुलिसकर्मियों ने पीडि़त का अधिवक्ता पहचान पत्र फाड़ दिया एवं पीडि़त के साथ गाली-गलौज करते हुए कहा कि ऐसे फर्जी पहचान पत्र सभी लोग बनवा लेते हैं। आधार कार्ड दिखाने पर ही अंदर जाने दिया जाएगा। जब पीडि़त ने बार एसोसिएशन के अध्यक्ष एवं सचिव को मोबाइल फोन से बुलाने का प्रयास किया, तो पुलिसकर्मी राखी गौड़, राजबहादुर सिंह एवं ए0के0 सिंह ने पीडि़त को लात-घूंसों से मारापीटा एवं पीडि़त की जेब में रखे 20 हजार रुपये लूट लिए। मारपीट से पीडि़त के शरीर पर चोटें आईं। पीडि़त की सूचना पर बार एसोसिएशन के सचिव कुंवर सिंह यादव एडवोकेट एवं वरिष्ठ उपाध्यक्ष अनूप सिंह एडवोकेट सहित कई अधिवक्ता मौके पर आ गए। जिन्होंने पीडि़त को बचाया। पीडि़त अपनी रिपोर्ट लिखाने कोतवाली फतेहगढ़ गया, किन्तु कोतवाली पुलिस द्वारा पीडि़त की प्रथम सूचना रिपोर्ट नहीं लिखी गई, बल्कि महिला कांस्टेबिल राखी गौड़ के प्रार्थना पत्र पर पीडि़त एवं बार एसोसिएशन के महासचिव कुंवर सिंह यादव सहित अन्य अज्ञात अधिवत्तालों के विरुद्ध प्रथम सचना रिपोर्ट मु0अ0सं0 141/2025 धारा 121(1), 132, 30४(२) बी0एन0एस0 में कोतवाली फतेहगढ़ में दर्ज कर ली गयी। जिसके बाद पीडि़त ने पुलिस अधीक्षक को रजिस्ट्री डाक के माध्यम से दिनांक 03.06.2025 को प्रार्थना पत्र भेजा एवं लोहिया अस्पताल में डाक्टरी परीक्षण कराया, लेकिन पीडि़त की रिपोर्ट दर्ज नहीं की गयी। तब पीडि़त ने न्यायालय की शरण ली। जिस पर न्यायालय ने संबंधित थाना पुलिस को सात दिन के अंदर सुसंगत धाराओं में मुकदमा पंजीकृत करने के आदेश दिये गये।

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