अंगदान करने वाले व्यक्ति ने सैफई विश्वविद्यालय की पार्किंग व्यवस्था पर उठाए सवाल

कुलपति के फैसले से मरीजों और एंबुलेंस को हो रही परेशानी का आरोप

सैफई : उत्तर प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय, सैफई में वाहनों की पार्किंग और आवागमन को लेकर लागू की गई व्यवस्था को लेकर असंतोष सामने आया है। आरोप है कि कुलपति प्रोफेसर डॉ. अजय सिंह द्वारा लिया गया यह निर्णय मरीजों के हितों के विपरीत साबित हो रहा है और इससे विश्वविद्यालय परिसर के भीतर व बाहर जाम और अव्यवस्था की स्थिति बन रही है।राष्ट्रीय सनातन सेना, मैनपुरी के जिला अध्यक्ष आशु पांडेय ने इस संबंध में गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने बताया कि 29 जनवरी 2026 को उन्होंने स्वयं अपना शरीर इस विश्वविद्यालय को दान किया है। उनके हृदय, लीवर और आंखें दान की गई हैं, ताकि जरूरतमंद मरीजों की जान बचाई जा सके। ऐसे में जब इसी संस्थान में मरीजों को अव्यवस्था का सामना करना पड़ रहा है, तो यह बेहद पीड़ादायक है।
आशु पांडेय ने कहा कि सैफई का यह अस्पताल ग्रामीण और अर्ध-ग्रामीण क्षेत्र के गरीब मरीजों के लिए बनाया गया है, लेकिन यहां की व्यवस्था ऐसे की जा रही है, जैसे यह दिल्ली, लखनऊ या मुंबई का कोई वीआईपी अस्पताल हो। उनका आरोप है कि कुलपति को केवल वीआईपी व्यवस्थाएं और फोटो सेशन नजर आ रहे हैं, जबकि जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग है।

उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय परिसर के भीतर पार्किंग के लिए पर्याप्त जगह उपलब्ध है। अंदर पक्की सड़कें हैं, वैकल्पिक रास्ते बने हैं और सीसी कैमरों की निगरानी भी रहती है। इसके बावजूद डॉक्टरों, कर्मचारियों और मरीजों की गाड़ियों को अंदर खड़ा करने की अनुमति नहीं दी जा रही है। नतीजतन गेट नंबर एक से लेकर गेट नंबर चार तक सड़क के दोनों ओर वाहन खड़े हो रहे हैं, जिससे संतोष मार्केट, अस्पताल चौराहा और आसपास के मार्गों पर घंटों जाम लग रहा है।
सबसे गंभीर स्थिति इमरजेंसी और ट्रॉमा सेंटर की बताई गई है। आरोप है कि गेट नंबर चार पर बैरियर लगाकर एंबुलेंस को रोककर जांच की जा रही है, जिससे कई बार मरीजों को 10 से 15 मिनट तक इंतजार करना पड़ता है। इस दौरान एंबुलेंस जाम में फंसी रहती हैं। इस स्थिति के वीडियो सोशल मीडिया पर भी पोस्ट किए गए हैं।
आशु पांडेय ने बताया कि उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से इन हालातों को सार्वजनिक करते हुए प्रदेश के मुख्यमंत्री से इस पूरे मामले पर ध्यान देने की अपील की है। उनका कहना है कि मुख्यमंत्री के स्पष्ट निर्देश हैं कि अस्पताल आने वाले मरीजों को किसी भी प्रकार की परेशानी न हो, लेकिन सैफई में स्थिति इसके उलट नजर आ रही है। उन्होंने पार्किंग व्यवस्था पर पुनर्विचार कर मरीजों के हित में व्यावहारिक समाधान निकालने की मांग की है।

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