फर्रुखाबाद, समृद्धि न्यूज। मुवक्किल की जमीन पर विरोधियों से मिलकर कब्जा करवाने के मामले में अधिवक्ता ने नगर क्षेत्राधिकारी सहित पांच लोगों के विरुद्ध न्यायालय में याचिका दायर की। दीपक दुबे एडवोकेट निवासी छोटी जेल चौराहा स्कूल के सामने ने दायर की याचिका में दर्शाया कि मेरे मुवक्किल अजय द्विवेदी पुत्र सुरेश बाबू निवासी 1/83 आवास विकास कालोनी छिबरामऊ जनपद कन्नौज के मुकदमे की पैरवी कर रहा हूं। जमीन से संबंधित मामला उच्च न्यायालय में अजय द्विवेदी बनाम अखिलेश आदि विचाराधीन है। मेरे मुवक्किल अजय द्विवेदी की एक कृषि भूमि नगला खैरबंदी तहसील सदर में स्थित है। अखिलेश शुक्ला, पारुल रस्तोगी, राजेन्द्र यादव के साथ मेेरे मुवक्किल ने मिलकर बराबर-बराबर हिस्से में क्रय की थी। जिसमें उक्त भूमि 21-21 डिसमिल बराबर सभी साझेदारों को मिलकर विक्रय की औरा बराबर धनराशि चेक के माध्यम से प्राप्त की। अखिलेश शुक्ला ने अपने सहयोगी अनूप त्रिवेदी पुत्र सत्यप्रकाश निवासी रुलापुर थाना अमृतपुर हाल निवासी तोताराम वाली गली कोतवाली फतेहगढ़ व हसीन खां उर्फ मतीन पुत्र खलील निवासी कटरा बख्शी झंडा ताला मऊदरवाजा के साथ मिलकर षड्यंत्र के तहत शेष जमीन अवैध रुप से कब्जा करने के उद्देश्य से मेरे मुवक्कित के फर्जी हस्ताक्षर, अंगूठा निशानी बनाकर 100 रुपये के स्टाम्प पर कूटरचित अनुबंध पत्र तैयार किया। अखिलेश शुक्ला पुत्र रामविलास निवासी मोहल्ला जाफरी के विरुद्ध शहर कोतवाली में मामला दर्ज है। इस संदर्भ में शिकायत पुलिस अधीक्षक से की गई। जिसकी जांच क्षेत्राधिकारी प्रदीप सिंह द्वारा की जा रही है। जिन्होंने अपने कार्यालय पर बुलाकर अखिलेश आदि के हक में बैनामा कराने का मेरे मुवक्किल पर दबाव बनाया था। सीओ भू-माफिया से सांठगांठ मिलकर मुवक्किल की शेष जमीन पर कब्जा कराकर वाउन्ड्री वाल बनवा दी। 24 जनवरी को पुन: फोन करके मुझे कार्यालय बुलाया और मेरे साथ गाली-गलौज कर मुवक्किल की वकालत करने से मना किया और कहा कि मुवक्किल से कह दो कि शेष जमीन अखिलेश आदि को बैनामा कर दें। जिस पर मैने बताया कि न्यायालय से स्टे कर दिया गया है। इस पर सीओ बौखला गये और धमकी देने लगे कि तुझे व तेरे परिवार को अनुपम दुबे से जोडक़र इतने मुकदमे लिख दूंगा कि जेल में सड़ जाओगेें और वकालत करना भूल जाओगे और एनकाउंटर करने की धमकी दी। मैं अपने एरिये में जो कहूंगा पुलिस वही करेगी। मंै काफी भयभीत हूं मुझे जान को खतरा है। इस संदर्भ में उच्चाधिकारियों से शिकायत की, लेकिन मेरी कोई सुनवाई नहीं हुई।
