
मेजर एसडी सिंह पीजी आयुर्वेदिक मेडिकल कालेज में तम्बाकू निषेध पर गोष्ठी
फर्रुखाबाद, समृद्धि न्यूज। राष्ट्रीय तम्बाकू नियंत्रण कार्यक्रम के तहत मेजर एसडी सिंह पीजी आयुर्वेदिक मेडिकल कालेज एवं हॉस्पिटल बेवर रोड बघार फर्रुखाबाद में भावी चिकित्सकों को तम्बाकू व तम्बाकू से बने उत्पादों का आजीवन सेवन न करने की शपथ दिलाई गई। प्राचार्य डॉ0 सुनील कुमार गुप्ता की उपस्थिति में नोडल अधिकारी एवं स्वस्थ वृत्त विभाग के लेक्चरर डॉ0 अरुण कुमार पाण्डेय ने सभी बैचों के अध्ययनरत भावी चिकित्सकों एवं कार्यक्रम में मौजूद लोगों को आजीवन तम्बाकू व उससे बने उत्पादों का सेवन न करने की शपथ दिलाई।
इससे पूर्व सेमिनार हाल में आयोजित कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए प्राचार्य डॉ0 सुनील कुमार गुप्ता ने कहा कि विश्व में प्रतिवर्ष 60 लाख लोग तम्बाकू के कारण अकाल मौत मरते हैं। आंकड़ों के अनुसार प्रत्येक 6.5 सेकेंड में धूम्रपान करने वाले एक व्यक्ति की मौत हो जाती हैं। अकेले भारत वर्ष में प्रतिदिन 2200 लोग तम्बाकू का सेवन करने के कारण मरते हैं। उन्होंने कहा कि भारत में कैंसर से मरने वाले 100 मरीजों में से 40 मरीजों में कैंसर का कारण तम्बाकू का सेवन करना होता है। डॉ0 गुप्ता ने बताया कि तम्बाकू का सेवन करने से इंसान की मानसिक स्थिति पर भी बुरा प्रभाव पड़ता है। तम्बाकू से केवल कैंसर ही नहीं होता बल्कि तम्बाकू के कारण हृदय रोग, मधुमेह, क्षय रोग (टीबी), अभिघात (लकवा), दृष्टिहीनता, फेफड़ेे के रोग, श्वास सम्बन्धी रोग भी हो जाते हैं। अगद तंत्र के विभागाध्यक्ष डॉ0 विजयमोहन गुप्ता ने कहा कि इस वर्ष तम्बाकू निषेध दिवस की थीम हमें भोजन की आवश्यकता है, तम्बाकू की नहीं रखी गई है। उन्होंने कहा कि सभी लोग स्वयं तो तम्बाकू व उसके उत्पादों का बहिष्कार करें ही साथ ही दूसरों को भी इसका प्रयोग न करने के लिए प्रेरित करें। विद्यार्थियों को तो इस जानलेवा बुरी चीज से कोसों दूर रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि कैंसर के मामलों में हमारा उत्तर प्रदेश अग्रणी राज्यों में से एक है। खैनी, जर्दा, पान मसाला (तम्बाकू युक्त) एवं धुआंरहित तम्बाकू में 4000 से अधिक विषैले और कैंसर के तत्व मौजूद होते हैं, जिनसे मुंह का कैंसर होने की प्रबल संभावना बन जाती है।
कार्यक्रम के नोडल अधिकारी एवं स्वस्थवृत्त विभाग के प्रवक्ता डा0 अरुण कुमार पाण्डेय ने धूम्रपान छोडऩे के फायदों को बताते हुए कहा कि धूम्रपान छोडऩे के 20 मिनट बाद ही रक्तचाप एवं हृदयगति सामान्य हो जायेगी। धूम्रपान छोडऩे के 24 घंटे के बाद जहरीली गैस कार्बन मोनेऑक्साइड शरीर से बाहर हो जाती है। धूम्रपान छोडऩे के 72 घंटे बाद श्वास लेना आसान हो जाता है। धूम्रपान छोडऩे के 3 से 9 महीने के पश्चात फेफड़े 10 प्रतिशत अधिक क्षमता से कार्य करने लगते हैं और शरीर के प्रत्येक अंग में रक्त का प्रवाह बढ़ जाता है। धूम्रपान छोडऩे के 12 से 60 महीने बाद हृदय रोग का खतरा आधा रह जाता है। धूम्रपान छोडऩे के 10 वर्ष बाद फेफड़े के कैंसर का जोखिम आधा हो जाता है। उन्होंने कहा कि मात्र एक चीज का त्याग करने से जब हमे इतने सारे फायदे हो रहे हैं तो हम ऐसी चीज का उपयोग क्यों करें। डॉ0 पाण्डेय ने भावी चिकित्सकों को शपथ दिलाई कि धूम्रपान एवं तम्बाकू उत्पाद का सेवन नहीं करेंगे, बच्चों और समाज को तम्बाकू से दूर रखेंगे तथा तम्बाकू कम्पनियों से किसी प्रकार का न सहयोग लेंगे और न ही किसी प्रकार का सहयोग देंगे।
कार्यक्रम में महाविद्यालय के प्राचार्य एवं अधीक्षक डॉ0 सुनील कुमार गुप्ता, उप चिकित्सा अधीक्षक डॉ0 नीतू श्री, डॉ0 वीएम गुप्ता, नोडल अधिकारी एवं लेक्चरर डॉ0 आनन्द बाजपेयी, महाविद्यालय के मेंटीनेंस प्रभारी राजवीर सिंह के अलावा अन्य शैक्षणिक व गैर शैक्षणिक स्टाफ मौजूद रहा।
