फर्रुखाबाद, समृद्धि न्यूज। पुलिस द्वारा नौ अभियुक्तों को पकडक़र न्यायालय में पेश कर न्यायालय से रिमांड पर देने की गुहार लगायी। साक्ष्य के अभाव में प्रभारी अपर मुख्य न्यायिक मजिस्टे्रट ने रिमांड प्रार्थना पत्र निरस्त करते हुए अभियुक्तों को २०-२० हजार रुपये के व्यक्तिगत बंधपत्र पर तुरन्त रिहा करने का आदेश दिया है।
कोतवाली मोहम्मदाबाद में धारा 191(२), 121(१), 132, 351(2) बीएनएस व 7 आपराधिक कानून संशोधन अधिनियम के तहत लालाराम, राज, राहुल, सोनपरी, संजी, राखी नीलम, मानसिंह, आरती को पुलिस ने गिरफ्तार न्यायालय के समक्ष पेश किया तथा अभियुक्तगणों की डिमांड दिए जाने की मांग की। अभियुक्तगणों की तरफ से अधिवक्ता सुरेंद्र बाबू शर्मा द्वारा मौखिक आपत्ति करते हुए कथन किया गया कि अभियुक्तगण प्रथम सूचना रिपोर्ट में नाम दर्ज नहीं है और पुलिस द्वारा उन्हें जानबूझकर फंसाया गया है रिमांड को निरस्त किया जाए। विवेचक द्वारा एफआईआर, केस डायरी, तथा सुसंगत प्रपत्र आदि परिशीलन किया गया। अभियुक्तगण धर्मेन्द्र, शेरु, लल्ला, और 10-15 महिला अज्ञातों के नाम दर्ज कराए गए हैं। केस डायरी में अवलोकन से विदित होता है कि केस डायरी के पर्चा संख्या १ में विवेचक द्वारा एफआईआर, नकल रपट , एफआईआर लेखक का बयान अंकित किया गया है। अभियुक्त धर्मेंद्र, शेरु, लल्ला को तलाश करने गए मौके पर अधिकारी को नामदर्ज अभियुक्त और उसके परिवार की 10-15 महिला व पुरुष घेर लिया और धक्का-मुक्की करने लगे और गाली-गलौज की। वादी में अपने बयान में कहा कि घटना के बाद वह और साहब जब छानबीन करने गए थे, अभियुक्तगण मानसिंह, राहुल, लालाराम, राज, सोनपरी, राखी, नीलम, संजी और आरती को घटना में शामिल होने का पता चला। विवेचक द्वारा केस डायरी में ऐसा कोई साक्ष्य संकलित नहीं किया गया। जिसके आधार पर गिरफ्तार किये गये अभियुक्तगणों की संलिप्ता इस स्तर पर प्रथम दृष्टि साबित होती हो। विवेचक द्वारा जल्दबाजी में एवं बिना पर्याप्त साक्ष्य संकलित किये गिरफ्तारी की गई है ऐसी स्थिति में केस डायरी पर उपलब्ध साक्ष के आधार पर इस स्तर पर अभियुक्तगणों की डिमांड स्वीकृत किए जाने योग्य नहीं है। विवेचक द्वारा अभियुक्तगणों का प्रस्तुत रिमांड प्रार्थना पत्र अस्वीकार किया जाता है। अभियुक्तण अभिरक्षा में है। उन्हें 20-२० हजार के व्यक्तिगत बंधपत्र प्रस्तुत करने पर अभिलंब रिहा किया जाए।
नौ अभियुक्तों की पुलिस ने मांगी रिमांड, अदालत ने अस्वीकार करते हुए रिहा करने के दिये आदेश
