कानपुर/फर्रुखाबाद, समृद्धि न्यूज। हेयर ट्रांसप्लांट के बाद एक और चौंकाने वाली मौत का मामला सामने आया है। जनपद फर्रुखाबाद निवासी 30 वर्षीय इंजीनियर मयंक कटियार की मौत डॉ0 अनुष्का तिवारी के क्लीनिक में कराए गए हेयर ट्रांसप्लांट के 24 घंटे के भीतर हो गई थी।
फर्रुखाबाद के बलदेव भवन भोलेपुर निवासी प्रमोदनी कटियार ने बताया कि उनके बेटे मयंक कटियार ने कानपुर के एक प्राइवेट क्लीनिक इंजीनियरिंग कॉलेज से बीटेक की पढ़ाई की थी। इसके बाद नौकरी कर रहा था। वह कानपुर में ही अपना बिजनेस सेटअप करने की तैयारी कर रहा था। पति की मौत के बाद बड़े बेटे मयंक के कंधों पर पूरी जिम्मेदारी थी। मृतक की मां प्रमोदिनी कटिहार ने बताया कि 18 नवंबर को मयंक ने अंपायर हेयर ट्रांसप्लांट क्लीनिक कानपुर में ट्रांसप्लांट कराया था। प्रक्रिया के कुछ ही घंटों बाद मयंक को सिर में तेज दर्द और चेहरे में सूजन की शिकायत हुई। जब परिजनों ने बार-बार डॉक्टर से संपर्क किया, तो उन्होंने कहा कि सब ठीक है, चिंता की बात नहीं, लेकिन जब हालत बिगड़ती चली गई, तब डॉक्टर ने एक कार्डियोलॉजिस्ट को दिखाने की सलाह दी।
परिजनों के मुताबिक मयंक बीते 18 नवंबर 2024 को हेयर ट्रांसप्लांट कराने केशवपुरम स्थित इंपायर क्लीनिक की डॉक्टर अनुष्का तिवारी के पास गया था। हेयर ट्रांसप्लांट होने के बाद छोटा बेटा कुसाग्र भाई मयंक को लेकर वापस घर आया। रात 12 बजे उसे सिर में दर्द उठा तो डॉक्टर से बात की। उन्होंने इंजेक्शन लगवाने की सलाह दी, लेकिन दर्द से राहत नहीं मिली। इसके बाद उन्होंने सिर की पट्टी ढीली करने के लिए कहा। मयंक रातभर दर्द से तड़पता रहा। फर्रुखाबाद के एक डॉक्टर को दिखाया। डॉक्टर ने जांच के बाद बताया कि हार्ट की कोई प्रॉब्लम नहीं है। इसका जहां पर हेयर ट्रांसप्लांट कराया है, वहां ले जाओ। परिजन मयंक को कानपुर ले जाने की तैयारी करने लगे। इसी दौरान उसने मां के हाथों में १९ नवम्बर को मयंक की मौत हो गयी। मृतक की मां ने चिकित्सक पर इलाज में लापरवाही के चलते पुत्र की मौत होने का आरोप लगाते हुए मुकदमा दर्ज कर कार्यवाही की मांग की थी।
इससे पहले भी हो चुकी है घटना
15 मार्च को इंजीनियर विनीत दुबे की भी हेयर ट्रांसप्लांट के बाद मौत हो गई थी। शिकायत के आधार पर पुलिस ने डॉ0 अनुष्का तिवारी पर मुकदमा दर्ज कर लिया था। फिल इस मामले में अभी तक कोई ठोस कार्यवाही सामने नहीं आयी है। इस मामले में पहले कार्यवाही हो गयी होती थी तो शायद एक जिंदगी बच सकती थी।
छह माह से भटक रहा पीडि़त परिवार
पीडि़त परिवार ने बताया कि बीते छह महीने से भटक रही है, लेकिन मेरी कहीं सुनवाई नहीं हो रही है। पुलिस ने पोस्टमार्टम भी नहीं कराया था। अब पुलिस पोस्टमार्टम न होने की बात कहकर कार्यवाही से पीछे हट रही है।
