रामचरित मानस मानव जीवन जीने का अधार: डा0 शिवओम अम्बर

फर्रुखाबाद, समृद्धि न्यूज। श्री राधा शक्ति श्याम मंदिर लोहई रोड डा0 शिवओम अम्बर द्वारा श्री रामचरितमानस के गहन अध्ययन चिंतन के प्रवचन दुनिया में राम कथाओं को विद्वानों ने अपने-अपने ढंग से श्रीराम की कथाओं को लिखा। गोस्वामी तुलसीदास ने वेद नाना प्रकार के पुणणो को श्रीराम कथा का आधार बनाया। इसलिए श्री रामचरितमानस को पांचवा वेद कहा गया। जिसमें संपूर्ण सनातन धर्म एवं मानव जीवन जीने का आधार है। लंका की व्याख्या करते हुए रावण की स्वर्ण लंका मानव जीवन की विभक्ति है, उसे जीत कर विभीषण को दिया। श्रीराम की निस्पृहता प्रकट करता है। गोस्वामी तुलसीदास की विनय पत्रिका श्री रामचरितमानस की कुंजी है। उसके अनुसार रावण मोह कुंभकरण उसका अहंकार, मेघनाथ उसका पुत्र काम है मोह, दशमीलितद भ्राता अंधकार है, लका काण्ड में विभीषण को दिया गया उपदेश रामोपनिषद कहा जता है। जो धर्मा रथ का प्रतीक है। कामरूपी मेधनाथ को वैराग रूपी लक्षमण मारते हैं, मोह और अंधकार का विनाश श्रीराम जी करते है। मोह के पात्र बदलते रहते हैं यही कारण है रावण के नए-नए शीश उगते रहते हैं। जब जीव रूपी विभीषण उसके भेद को बताते हैं कि उसकी नाभि में अमृत है। रहस्य बताता है उसका संहार हो पाता है। जिसको डॉ0 शिवओम अम्बर ने अपने ढंग से अन्य साहित्य का अध्ययन चिंतन मनन करके मानस की व्याख्या करते हुए रामो उपदेश दिया। लंका कांड का श्रुति फल जो व्यक्ति इसे पढे सुने उसे श्रीराम विजय ऐश्वर्या देते हैं। अरे मन तू देख यह कलयुग पापों का घर है। इससे बचने के लिए केवल श्रीराम का नाम जप कर ले। इसके अलावा दूसरा कोई आधार नहीं है। पापों को नष्ट करने वाला एक मात्र आधार श्रीरामचरितमानस है। रमेश चंद्र त्रिपाठी, सुरेंद्र सफ्फड़, निमिष टंडन, महेश पाल सिंह उपकारी, वैभव सोमवंशी, जितेंद्र अग्रवाल, हर्षित, रेनू सिगतिया, अलका पांडे, गरिमा पांडे, इंदिरा पांडे आदि लोगों ने डा0 शिवओम अंबर का स्वागत किया। कार्यक्रम का संचालन बृज किशोर सिंह किशोर ने किया।

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