रामकथा मनुष्य के जीवन की व्यवहार कथा है: आचार्य ज्ञानेश गौड़

पांचवें दिन पाण्डेश्वरनाथ मंदिर में भक्तों ने श्रीराम कथा का किया रसपान
फर्रुखाबाद, समृद्धि न्यूज। प्राचीन पांडेश्वर नाथ मंदिर भगवान भोले शंकर को समर्पित कथा के पंचम दिन की रामकथा में महाराज ने बताया कि यह अयोध्या कांड की कथा मनुष्य के जीवन की युवावस्था की कथा है। क्योंकि हमारे जीवन में जवानी का विशेष योगदान होता है हमारा जीवन भटकना है। हमारा जीवन बनना है, हमारा जीवन बिगडऩा है, हमारा जीवन अटकना है, यह सब युवावस्था में होता है और जिसकी युवावस्था व्यवस्थित हो जाए। उसकी संपूर्ण जीवन व्यवस्थित हो जाता है, राम कथा मनुष्य के जीवन की व्यवहार की कथा है। हमें घर में परिवार में समाज में, अपनों के साथ, बाहर वालों के साथ, कैसा व्यवहार करना है, एक मनुष्य के नाते हमे जानना है, सीखना है तो उसे रामचरितमानस की शरण लेनी होगी। हमें परिवार में व्यवहार के साथ-साथ भजन को भी स्थापित करना चाहिए। जिस परिवार में एक साथ भजन करना आ जाएगा, एक साथ भोजन किया जाएगा। एक साथ ईश्वर का पूजन किया जाएगा और जिस परिवार के समस्त सदस्य एक दूसरे का सम्मान करेगे। वह परिवार कालांतर में सभी के लिए वंदनीय हो जाता है। महाराज आचार्य ज्ञानेश गौड़ ने कहा कि राम कथा केवल शरणागति का उपदेश है लक्ष्मण जी की शरणागति हुई दंडकारण्य में ऋषि मुनियों की शरणागति हुई, विभीषण जी की शरणागति हुई, श्री हनुमान जी की शरणागति हुई अनेकों भक्तों की शरणागति हुई। यह ग्रंथ ही शरणागति का है, श्री रामचंद्र चरणों शरणम प्रपधे,
भगवान की वन गमन लीला की कथा सुनकर भक्तगण भाव विभोर हो गए। यजमान के रुप में सुदेश दुबे, स्वेता दुबे, डा0 रमाकांत तिवारी, पंकज वर्मा, लालाराम दुबे, विनीत अग्निहोत्री, शिखा अग्निहोत्री, प्रमोद झा, भप्पू सोनी, आशुतोष अवस्थी, प्रवीन पाल, प्रभात मिश्रा, धीरेंद्र वर्मा, नीरज शुक्ला, अजीत पांडे, विजय सिंह कन्नौज आदि उपस्थित रहे।

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