फर्रुखाबाद, समृद्धि न्यूज। भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने घोषित अपनी मौद्रिक नीति में रेपो रेट में फिर 0.25 प्रतिशत की कमी करके भारतीय अर्थव्यवस्था की बढ़ती हुई गति को एक नई तीव्रता प्रदान करने की कोशिश की है। इससे पहले भी इस वर्ष कई बार रिजर्व बैंक द्वारा रेपो रेट में कमी की जा चुकी है। रिजर्व बैंक की इस नीति से भारत के आम उपभोक्ताओं को काफी राहत मिलेगी और साथ ही साथ उद्योग जगत को भी इससे काफी फायदा पहुंचेगा।
आरबीआई की इस मौद्रिक नीति पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए भारतीय स्टेट बैंक से रिटायर्ड, भारतीय उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल के प्रदेश संगठन मंत्री मुकेश गुप्ता ने बताया कि केंद्रीय बैंक द्वारा ब्याज दरे काम करने से भारत का आर्थिक विकास अब और तेज गति पकड़ेगा। उन्होंने कहा कि रेपो रेट ब्याज की बह दर होती है जिस दर पर भारतीय रिजर्व बैंक वाणिज्यिक बैंकों को ऋण देता है, इस प्रकार रेपो रेट कम होने से वाणिज्यिक बैंकों को कम ब्याज दर पर ऋण उपलब्ध हो जाने के परिणाम स्वरूप वाणिज्यिक बैंक भी उद्योगों व अपने ग्राहकों को पहले से कम ब्याज दर पर लोन प्रदान कर सकेंगे। जिससे एक तरफ वाणिज्य बैंकों द्वारा कम ब्याज चुकाने के कारण उनके पास उपलब्ध फंड्स में वृद्धि होगी और वह इस प्रकार ज्यादा मात्रा में लोन वितरित कर सकेंगे। वहीं दूसरी तरफ ग्राहकों को कम ब्याज दर पर लोन मिलने के कारण उनके द्वारा चुकाई जाने वाली मासिक किस्त में काफी कमी आएगी। इस प्रकार उनकी बचत में वृद्धि होगी और यह उपभोक्ता अपनी इस बचत को अपने अन्य उपभोक्ता की वस्तुओं को खरीदने में लगाएंगे, जिससे बाजार में उत्पादों की मांग में वृद्धि होगी। जब मांग में वृद्धि होगी तो उद्योगों को अपनी उत्पादन क्षमता को बढ़ाना पड़ेगा और इसके लिए उन्हें ज्यादा मैन पावर की जरूरत पड़ेगी। जिसके परिणाम स्वरुप लोगों को काफी नया रोजगार मिलेगा और बेरोजगारी में कमी होगा। इस प्रकार यह चक्र कम से चलता रहेगा। इसी प्रकार उद्योगों को भी वाणिज्यिक बैंकों से कम ब्याज दर पर पूंजी उपलब्ध हो सकेगी, जिससे उद्योगों की उत्पादन लागत भी कम होगी। फरवरी 25 में जो आम बजट पेश हुआ था, उसमें आयकर मुक्त सीमा में काफी वृद्धि करके 12 लाख कर देने से भी लोगों की बचत में वृद्धि हुई है, उसके बाद 22 सितंबर 2025 से जीएसटी रिफॉर्म के तहत जीएसटी टैक्स स्लैब कम करने से भी लोगों की बचत में वृद्धि हुई है और सरकारी कर्मचारियों को ज्यादा बोनस देने से भी इन कर्मचारियों की बचत में वृद्धि हुई है। उपर्युक्त सभी प्रयासों से अंतत: हमारे देश की घरेलू बचत में काफी वृद्धि होगी और लोगों की परचेसिंग पावर बढ़ेगी, इससे लोग मकान, दुकान बनवाएंगे या खरीदेंगे, ऑटो प्रोडक्ट खरीदेंगे व घरेलू अन्य उपभोग की वस्तुओं को ज्यादा से ज्यादा खरीदेंगे और बाजार में उत्पादों की मांग बढऩे से हमारे उद्योग धंधे भी फलेंगे फुलेंगे। इधर अक्टूबर और नवंबर माह में कई उपभोक्ता वस्तुएं बनाने वाली कंपनियों ने अपनी सेल में लगातार वृद्धि के आंकड़े पेश किए हैं जो इसका जीता जागता उदाहरण है। उत्पादन लागत कम होने से हमारे उत्पाद अंतरराष्ट्रीय औद्योगिक प्रतिस्पर्धा में भी सामना कर सकेंगे। अमेरिका द्वारा अनाप-शनाप टैरिफ लगाने के बाद मौजूदा वैश्विक अस्थिरता के माहौल में भारत अपनी अर्थव्यवस्था को सुरक्षित रखने में सक्षम बना हुआ है, क्योंकि भारतीय बाजार में उसकी एक विशाल जनसंख्या लगभग 140 करोड़ लोगों द्वारा खपत होने से एक बहुत बड़ी मांग बाजार में लगातार बनी रहती है। इसी बदौलत आज भारत दुनिया की सबसे तेज बढ़ती हुई अर्थव्यवस्था बना हुआ है और इन सब उपयुक्त प्रयासों से शीघ्र भारत दुनिया की एक बहुत बड़ी अर्थव्यवस्था बनेगा।
रेपो रेट में फिर 0.25 प्रतिशत की कमी से आयेगी अर्थव्यवस्था में नई तीव्रता: मुकेश गुप्ता
