40 वर्षों से मेला रामनगरिया में कल्पवास कर रहे साबिर अली

 गुरु फक्कड़ बाबा के आदेश से शुरु हुआ सफर आज भी जारी
फर्रुखाबाद, समृद्धि न्यूज। पांचाल घाट गंगा तट स्थित गंगा की गोद में मेला रामनगरिया आबाद है। यहां पर विभिन्न जिलों से आये श्रद्धालु कल्पवास कर पूजा भजन में लीन हैं। इन्हीं में से एक भक्त साबिर अली भी हैं। वह करीब ४० वर्षों से मेला रामनगरिया में आकर कल्पवास कर रहे हैं। वह अन्य भक्तों की तरह पूजा पाठ में लीन रहते हैं।
कायमगंज के पितौरा निवासी साबिर अली का कहना है कि उनके गुरु फक्कड़ बाबा के आदेश से उनका यह आध्यात्मिक सफर शुरु हुआ जो आज भी बदस्तूर जारी है। उन्होंने बताया कि 40 साल पहले उनकी मुलाकात एक फक्कड़ बाबा से हुई। जिन्हें उन्होंने अपना गुरु स्वीकार किया। गुरु के आदेश पर ही उन्होंने माघ मेले में कल्पवास शुरू किया था। दो साल पहले उनके गुरु का देहांत हो गया। जिसके बाद से साबिर अली आज भी उसी स्थान पर अपनी राउटी लगाते हैं जहाँ कभी उनके गुरु रहा करते थे। साबिर अली का जीवन इन दिनों पूरी तरह से एक कल्पवासी के नियमों में ढला हुआ है। उनकी दिनचर्या बेहद अनुशासित है। सुबह 5:30-6:00 बजे कड़ाके की ठंड में गंगा स्नान तथा दिन भर संतों के आश्रमों में जाकर सेवा करना और सत्संग में भाग लेना। उन्होंने कहा कि भोजन के रुप में वह भंडारे में मिलने वाला प्रसाद ग्रहण करते हैं। शाम को आरती और भागवत कथा सुनने के बाद अपनी राउटी में विश्राम करते हैं। आस्था का यह सिलसिला अब उनकी अगली पीढिय़ों तक भी पहुँच रहा है। साबिर अली बताते हैं कि पहले उनका बेटा इस दौरान उनके साथ समय बिताता था और अब उनका पोता भी उनके साथ कल्पवास में शामिल होने लगा है। वे अपनी इस अटूट श्रद्धा का श्रेय गंगा माँ की कृपा को देते हैं। साबिर अली की इस निष्ठा की सराहना केवल मुस्लिम समुदाय ही नहीं, बल्कि मेले में आए अन्य श्रद्धालु भी कर रहे हैं। उनके पडड़ोस में राउटी लगाने वाले हरदोई के वेद प्रकाश और श्रद्धालु दृगपाल सिंह का कहना है कि साबिर अली पिछले 40 वर्षों से निरंतर यहाँ आ रहे हैं और वे हम सभी के लिए आपसी भाईचारे की एक महान प्रेरणा हैं।

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