फर्रुखाबाद, समृद्धि न्यूज। आर्य समाज कमालगंज के तत्वावधान में चल रहे श्रावणी वेद प्रचार अभियान के अंतर्गत आर्य समाज कमालगंज में वेद प्रचार गोष्टी का आयोजन किया गया। वैदिक विद्वानों ने अपने-अपने वेदोक्त विचार प्रस्तुत कर वेदों की महिमा का गुणगान किया। साथ ही यज्ञ का आयोजन किया गया। जिसमें सभी श्रद्धालुओं ने भक्तिभाव से आहुतियां प्रदान कीं। संयोजक आचार्य संदीप आर्य ने कहा कि वेद, सनातन धर्म के मूल और सबसे प्राचीन ग्रंथ हैं, जिन्हें ईश्वर प्रदत्त माना गया है। वेदों को ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और अथर्ववेद-इन चार भागों में विभाजित किया गया है। इन ग्रंथों में न केवल जीवन जीने की कला सिखाई गई है, बल्कि आत्मा की मुक्ति का भी मार्ग दर्शाया गया है। वेद हमें यह बताते हैं कि मानव जीवन का परम लक्ष्य केवल भौतिक सुख-सुविधाएं प्राप्त करना नहीं है, बल्कि आत्मा का मोक्ष प्राप्त करना है। वेदों के अनुसार, मुक्ति तभी संभव है जब आत्मा ईश्वर के साक्षात्कार द्वारा जन्म-मरण के चक्र से मुक्त हो जाए। इसके लिए वेद यज्ञ, तप, सत्य, ब्रह्मचर्य, सेवा, और ध्यान जैसे साधनों का वर्णन करते हैं। वेदों में वर्णित सत्यम्, ज्ञानम्, अनन्तम् ब्रह्म, यह उद्घोषणा बताती है कि परम सत्य, अर्थात् ब्रह्म, ही मुक्ति का अंतिम लक्ष्य है। जब मनुष्य स्वार्थ, अहंकार और मोह से ऊपर उठकर आत्मा और परमात्मा के सत्य स्वरूप को जान लेता है, तभी वह मुक्त होता है। इसलिए जो व्यक्ति वेदों के ज्ञान को आत्मसात करता है और उनके अनुसार आचरण करता है, वह न केवल इस लोक में धर्ममय जीवन जीता है, बल्कि परलोक में मोक्ष को प्राप्त करता है। घनश्याम आर्य ने कहा वेदों से दूर जाने के कारण ही मनुष्य के जीवन मे दु:ख निरंतर बढ़ते जा रहे हैं जीवन को सुखमय बनाने के लिए हमें वेदानुकूल आचरण अपनाना चाहिए। रमेश आर्य ने कहा कि वेद एकेश्वरवाद का संदेश देते हैं और मतमतान्तर अनेक ईश्वरो में बंटे हुए हैं यही विश्व मे झगड़े का कारण बनते हैं। अत: विश्वशांति की स्थापना के लिए हमे आपसी मनमुटाव भुलाकर वेदों की शरण में आकर एक ईश्वर की उपासन करनी चाहिए। प्रदीप आर्य ने आये हुए विद्वान व अतिथियों का वैदिक साहित्य भेंट कर स्वागत किया। कार्यक्रम में आचार्य सतीश देव, राम रहीस आर्य, अरुण राठौर, अभ्युदय राठौर, सुरेश बाबा, श्यामसिंह यादव, नीतीश राठौर, रजत, अनुराग, अर्पित, कमल गुप्ता, राहुल राजपूत, प्रमोद राजपूत, नीलम आर्या, सुगाता देवी, आकांक्षा राठौर आदि उपस्थित रहे।
वेदों में छिपा है मुक्ति का मार्ग: संदीप आर्य
