
फर्रुखाबाद, समृद्धि न्यूज। पर्यावरण का संरक्षण करना प्रत्येक मनुष्य का कर्तव्य है। इस कर्तव्य को हम सभी को निभाने की जरुरत है। पर्यावरण संरक्षण का मुख्य उद्देश्य प्राकृतिक पर्यावरण के क्षरण को रोकना जो बढ़ती जनसंख्या प्रौद्योगिकी और अधिक खपत से प्रभावित है। इन सभी ने पर्यावरण पर नकारात्मक प्रभाव डाला है और मनुष्यों व जानवरों को खतरे में डालना जारी है। आमतौर पर पेड़ों और हरियाली के संरक्षण को दर्शाता है, लेकिन व्यापक अर्थों में इसका तात्पर्य पेड़ों, पौधों, पशुओं, पक्षियों पूरे गृह की सुरक्षा से है। इसके लिए अधिक से अधिक पेड़ लगायें। वन्य जीव और वर्षा वन की रक्षा करें। कम उपयोग करें, पानी की खपत कम करें।
पर्यावरण जागरुकत का वीणा उठाते हुए पर्यावरण की प्रहरी बनीं एन.ए.के.पी. महाविद्यालय की अंग्रेजी विभागाध्यक्ष डॉ0 शिल्पी मिश्रा ने बताया जैव विविधता को ं्रसंरक्षण प्रदान करके जनता को जागरुक करना, जलीय संसाधनों की सुरक्षा के उपाय करके जनता को जागरुक करना, खनिज संसाधनों की सुरक्षा के उपाय कर आमजन को जागरुक करना, वन विनाश की समस्या से निपटना, भू क्षरण मरुस्थलीय करण तथा सूखे के बचाव के प्रस्तावों को जनता के समक्ष रखना यही जागरुकता पर्यावरण के संरक्षण के लिए उपयोगी है। हम सब लोगों को चाहिए कि प्रदूषण को रोकें, पॉलीथिन का प्रयोग न करें। घर से बाजार जायें, तो हाथ में थैला लेकर निकलें। जिससे कोई सामग्री पॉलीथिन में लाना न पड़े, तभी पर्यावरण की सुरक्षा हो सकेग। इसके लिए जिम्मेदार हम सब लोग हैं। जब हम सब लोग ही जागेंगे, तभी पर्यावरण की सुरक्षा और अच्छी होग। लोग अपने घरों में नलों की टोंटी को खुला न छोड़ें, क्योंकि पानी अनमोल है, क्योंकि पानी की कमी के कारण जलस्तर घटता जा रहा है। पशु पक्षी भूखे प्यासे तड़प रहे हैं। काफी जलाशय, तालाब सूख चुके हैं। पेड़ों का कटान भी रोका जाये। जिससे ऑक्सीजन मिल सके। प्रदूषण से बचने के लिए हमें अत्यधिक पेड़ लगाने होंगे। प्रकृति में मौजूदा प्राकृतिक संसाधनों को अंधाधुंध दोहन करने से बचाना होगा। हमें प्लास्टिक की चीजों के इस्तेमाल से परहेज करना होगा। कूड़े कचरे को इधर, उधर नहीं फेंकना होगा, तभी हम पर्यावरण की सुरक्षा कर सकते हैं। एन.ए.के.पी. महाविद्यालय की छात्राओं को पर्यावरण जागरुकता की शपथ दिलाकर जागरुक किया गया।
