फर्रुखाबाद, समृद्धि न्यूज। मुस्लिम कैलेंडर के मुताबिक शाबान मोअज्जम की 14 तारीख को शब-ए-बारात मनाया जायेगा। यानी 13 फरबरी बरोज जुमेरात दिन गुज़ार कर आने वाली रात शब-ए-बारात है। शब-ए-बारात दो शब्दों से मिलकर बना होता है। शब का अर्थ रात और बारात का अर्थ होता है बारी होना है। शाबान का चांद दिखते ही शब-ए-बारात को लेकर मुस्लिम धर्म में मस्जिद, दरगाह, खानकाह, मदरसों और क़ब्रिस्तानों में सफाई का कार्य शुरू कर दिया जाता है।
इस्लामी कैलेंडर के आठवां महीना शाबान मोअज्जम का होता है, इस रात को मुस्लिम क़ब्रिस्तानों में जाकर अपने पूर्वजों की कब्रों पर फातिहा पढक़र उनको इसलिए ईसाले सवाब पहुंचाते हैं। यह बात शहर फतेहगढ़ की गंगा जमुनी तहज़ीब की मिसाल दरगाह हजऱत मखदूम शाह सय्यद शहाबुद्दीन औलिया अलैहि रहमा के नायब सज्जादा नशीन शाह मुहम्मद वसीम उर्फ मुहम्मद मियां ने एक संबोधन करते हुए कही। मोहम्मद मियां ने बताया कि शब-ए-बारात की रात को अल्लाह रहमतों व नेअमतो के दरवाज़े खोल देता है और बरकतों का नुज़ूल शुरू हो जाता है। बंदों की खताये (गुनाह) बारगाहे इलाही में माफ किए जाते है। मजहबे इस्लाम में शाबान का महीना एक मुकद्दस महीना माना जाता है। इस महीने को हजऱत मुहम्मद अलैहि वसल्लम का महीना करार दिया गया है। शब-ए-बारात की रात को जागकर इबादत करो और अगले दिन में रोज़ा रखो। इस रात को अल्लाह अपनी शान और शौकत के मुताबिक आसमान से दुनिया में रहमतों का नुज़ूल फरमाता है और ऐलान करता है कोई है रिज्क, मुसीबत से निजात व बख्शीश मांगने वाला ताकि मैं उस बख़्श दु। यह सिलसिला सुबह फजर तक चलता रहता है, इस रात को अल्लाह की जानिब से बंदों की रोज़ी रोटी, हयात व मौत के साथ दीगर कामों की सूची तैयार की जाती है।
शब-ए-बरात पर होता है अल्लाह की रहमतों का नजूल: नायब सज्जादा नशीन
