
फर्रुखाबाद, समृद्धि न्यूज। मकानों में बरसात का पानी घुसने से आक्रोशित मोहल्ला तुलसी नगर के वाशिंदों ने विरोध जताया और पालिका अध्यक्ष के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। जानकारी के अनुसार वार्ड नंबर 12 तुलसी नगर में बरसात का पानी लोगों के घरों में घुस गया। जिससे लोग भड़ गये और पानी से भरी गली में खड़े होकर पालिका अध्यक्ष वत्सला अग्रवाल के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। मोहल्ले की मंजू श्रीवास्तव, शीतला देवी, पल्लो, गोविंद, धर्मेंद्र ने बताया कि उनके मकानों में बरसात का पानी घुस गया। जिससे लोगों को निकलने बैठने में दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है। दो मकानों में सांप निकलने से लोगों में भय व्याप्त है। उनका कहना है कि बरसात के बीच बिजली कटौती भी जारी है। जिससे कुछ दिखायी नहीं पड़ता है। नवनिर्वाचित सभासद अनिल तिवारी ने बताया कि गली बनाने के लिए प्रस्ताव दे दिया गया है। नगर पालिका चेयरमैन अपनी मनमानी पर उतारू हैं। मोहल्ले के लोगों की दुर्दशा जानवरों से भी बदतर है। इन्हें देखने वाला कोई नहीं है। मोहल्ले की आशीष कुमारी ने कहा कि 20 वर्षों से गली का निर्माण नहीं हुआ है। बरसात के मौसम में पूरी-पूरी रात घर के अंदर भरे पानी को निकालने में बीत जाती है। चुनाव के समय वोट मांगने तो सभी नेता आते हैं, लेकिन चुनाव के बाद कोई देखने नहीं आता है मंजीता श्रीवास्तव ने कहा कि बरसात के मौसम में कच्ची गली होने के कारण पैरों तक पानी भरा होने से कीचड़ से होकर निकलने को मजबूर हैं। पानी का कोई निकास ना होने के कारण घर के अंदर पानी भर गया है। खाना बनाने के लिए भी जगह नहीं बची है। बरसात के मौसम में दो बार घर के अंदर से सर्प भी निकले हैं। घर में छोटे-छोटे बच्चे हैं डर का माहौल बना हुआ है। शशि ने कहा कि मकानों में पानी भर जाने के कारण ऊंचाई पर गैस चूल्हा रखकर खाना बनाकर बच्चों की भूख मिटा रहे हैं। गली में कीचड़ गंदगी व पानी भरे होने से निकलने की जगह नहीं है। समस्या का कोई भी निस्तारण नहीं हो रहा है। जनजीवन पूरी तरह प्रभावित है। बरसों बीत जाने के बाद भी वार्ड में अभी तक गली का निर्माण नहीं हुआ है। गोपाल पेंटर ने कहा कि काफी बार चेयरमैन को लिखित व मौखिक समस्या से अवगत कराया गया है। उसके बाद भी चेयरमैन नहीं सुन रही हैं। हम लोग कीचड़ गंदगी में जीवन यापन करने को मजबूर हैं। चुनाव के समय नेता बड़े बड़े वादे करते हैं उसके बाद कोई भी देखने वाला नहीं है हम लोग परेशानियों में रहने को मजबूर हैं। इसको लेकर उनमें रोष है।
