फर्रुखाबाद, समृद्धि न्यूज। जिला कृषि अधिकारी सत्येन्द्र सिंह ने किसान भाइयों से कहा कि जनपद में बासमती चावल की खेती बहुतायत क्षेत्रफल में की जा रही है। कृषि विभाग का यह प्रयास होता है कि आपके द्वारा जो भी फसल का उत्पादन किया जा रहा है। उसका आपको अधिक से अधिक मूल्य मिल सके। बासमती चावल से अधिक मूल्य प्राप्त करना, तभी संभव है जब बासमती चावल का अधिक से अधिक दूसरे देशों में निर्यात हो, इसके लिए हमें कुछ सावधानियां बरतनी होंगी, क्योंकि बासमती चावल आयात करने वाले देश यूरोपीय संघ, यू0एस0ए0 एवं खाड़ी देशों में निर्यात पर फसल में प्रयोग किये जाने वाले कीटनाशकों की मात्रा मानक से अधिक होने के कारण प्रतिबंध लगा दिये हैं। जिसके कारण विगत वर्षों में निर्यात में १५ प्रतिशत की गिरावट आयी है। अन्तर्राष्ट्रीय बाजार में मांग कम हो जाने से इसका सीधा असर यहां के बाजार मूल्य पर पड़ा है। जिससे आपको जो मूल्य मिलना चाहिए वह नहीं मिल सका। इन्हीं बातों को ध्यान में रखते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने सरदार पटेल कृषि विश्वविद्यालय मेरठ, कृषि एवं सहकारिता और किसान कल्याण विभाग/पौध संरक्षण विभाग, कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय भारत सरकार की संस्तुतियों को दृष्टिगत रखते हुए बासमती चावल में निम्न कीटनाशकों के सभी फार्मुलेशन की बिक्री वितरण और प्रयोग को बासमती चावल पैदा करने वाले जनपद सहित ३० जनपदों में प्रतिबंधित कर दिया है। ताकि गुणवत्तायुक्त बासमती चावल का उत्पादन कर निर्यात में वृद्धि की जा सके। प्रतिबंधित कीटनाशक ट्राइसाइक्लाजोल, बुप्रोफेजिन, एसीफेट, क्लोरपाइरीफॉस, हेक्साकोनोजोल, प्रोपीकोनाजोल, थायोमैथाक्साम, प्रोफोनोफॉस, इमिडाक्लोप्रिड, कार्वेडाजिम आदि कीटनाशक शामिल हैं।
बासमती धान की फसल में प्रयोग किये जाने वाले दस कीटनाशक प्रतिबंधित
