बाढ़ ने मचाई तबाही, तो वहीं दूसरी ओर आफत बनकर आयी वारिश

अमृतपुर, समृद्धि न्यूज। कहते हैं जब व्यक्ति दोहरी मार को झेलता है तो वह पूरी तरह से टूट जाता है। फिर उसको संभलना भी मुश्किल हो जाता है। यही हाल है इस समय अमृतपुर तहसील क्षेत्र के वाशिदों का। एक तरफ गंगा की बाढ़ ने तबाही मचा रखी है। जिससे लोगों को अपना घर भी छोडऩा पड़ा है। लोग सड़कों व छतों पर पन्नी तानकर रहने को मजबूर हैं। वहीं दूसरी ओर बारिश ने उनकी जान की आफत कर दी। पेट भरने के लिए रखे अनाज आदि भींगकर खराब होने की कगार पर पहुंच गए। क्षेत्र के कई गांव ऐसे हैं जहां के प्रधानों की लापरवाही की वजह से अभी तक ना ही राशन सामग्री पहुंची और ना ही उनके निकलने के लिए नाव मिल पाई। ग्राम सभा दौलतपुर चकई के प्रधान को संबंधित लेखपाल के द्वारा कई बार फोन किया गया और कहा आप नाव ले जाएं आकर, परंतु प्रधान ने उस पर कोई भी ध्यान नहीं दिया। जिससे वहां के ग्रामीणों को मुख्य मार्ग तक 2 किलोमीटर तक कमर से ऊपर भरे पानी में चलकर आना पड़ रहा है। तहसील क्षेत्र के लगभग दो दर्जन गांव का संपर्क मुख्यालय से टूट चुका है जिससे वहां के ग्रामीण काफी चिंतित है। कोई भी जनप्रतिनिधि उनकी खबर लेने नहीं जा रहा है। उपजिलाधिकारी अमृतपुर रविंद्र सिंह ने बताया इससे पहले जब पानी लोगों के घरों में घुसा था तब तहसील प्रशासन की तरफ से 4833 राहत सामग्री पैकेट 27 गांव के ग्रामीणों को वितरित किए गए थे। इस बार भी हम लोगों के द्वारा 29 गांव की 5575 राहत सामग्री पैकेट की डिमांड शासन को भेज दी गई थी। जो कि राशन सामग्री तहसील मुख्यालय पर आने लगी है और जिसको हम लोगों के द्वारा बाढ़ प्रभावित ग्रामीणों तक पहुंचाई जा रही है। इसके अलावा हमारे सभी बाढ़ चौकियां एवं शरणालय पूरी तरह से तैयार हैं हम लोग लोगों से अपील करते हैं कि जिन लोगों के घरों में पानी अधिक भरा है वह अपने घर से निकलकर शरणालय में पहुंच जाएं। उनको किसी प्रकार की दिक्कत नहीं होने दी जाएगी एवं बाढ़ से जिन किसानों का जो भी नुकसान हुआ है उसका बाढ़ खत्म होते ही राजस्व कर्मियों द्वारा आंकलन कराया जाएगा और उन सभी को सरकारी राहत सहायता प्रदान की जाएगी। फिलहाल ग्रामीणों की रातों की नींद और दिन का चैन छिन गया है।

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