समस्त दुखों का मूल कारण अविद्या:चन्द्रदेव शास्त्री

फर्रुखाबाद, समृद्धि न्यूज। आर्य प्रतिनिधि सभा के तत्वावधान में मेला श्रीरामनगरिया में चल रहे वैदिक क्षेत्र में चरित्र निर्माण शिविर में सोमवार को ऋषि दयानन्द के 200 वर्ष पूर्ण होने पर प्रात:काल विशाल महायज्ञ किया गया। आचार्य चन्द्रदेव शास्त्री ने बताया कि ऋषि दयानन्द सरस्वती की जन्म जयन्ती है। ऋषि दयानन्द का जन्म 12 फरवरी 1824 को गुजरात की धरती टंकारा में हुआ था। ऋषि दयानन्द दो उद्देश्य लेकर घर से निकले थे, एक सच्चे शिव की खोज दूसरा मृत्यु पर विजय प्राप्त करने के लिए। महर्षि दयानन्द सरस्वती इन्हीं दो उद्देश्यों को लेकर गुरुवर विरजानन्द दंडी के पास मथुरा पहुंचे। प्रज्ञाचक्षु विरजानन्द ने पूंछा तुम कौन हो, इसके उत्तर में ऋषि दयानन्द कहते हैं मैं यही तो जानने के लिए आया हूं कि मैं कौन हूं। इतना उत्तर सुनकर विरजानन्द ने दरवाजे को खोला।

इतिहास के मनीषियों ने लिखा कि जिस समय दयानन्द के लिए गुरुवर विरजानन्द ने गुरुकुल का दरवाजा खोला वो दरवाजा केवल दयानन्द के लिए ही नहीं खुला था, अपितु भारतवर्ष के सौभाग्य का दरवाजा खोल दिया था। समस्त दुखों का मूल कारण अविद्या है। संसार के लोग अविद्यान्धकार को दूरकर दुखों से बच जाएं, इसी उद्देश्य को लेकर ऋषि दयानन्द ने नारा दिया- वेदों की ओर लौटो। भारतवर्ष की आजादी के लिए सर्वप्रथम स्वराज्य उद्घोष ऋषि दयानन्द ने ही किया था। उदिता आर्या ने अगर न आते दयानन्द न मिलता हमें किनारा। कैसा ये सौभाग्य है हमारा तुम्हारा।। भजन से सभी श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। पं0 शिवनारायण आर्य, पं0 अनिलदत्त नादान, पं0 रामवीर आर्य आदि ने प्रभु भक्ति, राष्ट्र भक्ति, ऋषि महिमा भजनों से लोगों को सत्य धर्म पर चलने की प्रेरणा दी। सन्दीप आर्य ने सभा का संचालन किया। इस मौके पर उत्कर्ष आर्य, उदयराज आर्य, हरिओम शास्त्री, आचार्य महावीर शास्त्री, शिशुपाल आर्य, संजीत आर्य, रत्नेश द्विवेदी, उपासना कटियार आदि उपस्थित रहे।

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