बांदा: दरिंदगी का शिकार हुई तीन वर्षीय मासूम ने तोड़ा दम, हैवानियत ने पूरे परिवार को झकझोर कर रख दिया

समृद्धि न्यूज। बांदा में दुष्कर्म का शिकार हुई तीन वर्षीय मासूम ने सात दिन तक अस्पताल में मौत से जंग लडऩे के बाद दम तोड़ दिया। सात दिनों में बच्ची ने जीने के लिए काफी संघर्ष किया, लेकिन अंत में वह बुधवार सुबह खामोश हो गई। बांदा दुष्कर्म की घटना के बाद जिस बच्ची की मौत हुई है वह परिवार व पड़ोस में सभी की दुलारी थी। उसकी बोली भाषा के सभी कायल रहते थे। कहने को तो वह छोटी थी लेकिन उसके अंदर समझदारी अन्य बच्चों से ज्यादा थी। दिन भर घर व परिवार वालों के बीच खेलना व चहकना रह-रहकर सभी को याद आ रहा है। आंगनबाड़ी से पढक़र आने के बाद रोजाना वह मां से लिपटकर दुलार करती थी। बिटिया की याद में मां व स्वजन फफक कर रोये। हैवानियत की घटना किसी के जेहन से नहीं उतर रही है।
जानकारी के मुताबिक, चिल्ला थाना क्षेत्र के एक गांव में तीन जून की शाम चार बजे घर के पास खेल रही तीन वर्षीय बच्ची को 26 वर्षीय पड़ोसी दो बच्चों के पिता सुनील निषाद ने दुकान से पान मसाला व चाकलेट लाने के बहाने अपने घर बुलाया था। बाद में जहां आरोपित ने बच्ची के साथ दुष्कर्म किया था। बच्ची के बेहोश होने पर आरोपित ने उसे मृत समझ मछली वाली बर्फ की नीली थर्माकोल की पेटी में भरकर साइकिल से करीब नौ किलोमीटर दूर पदारथपुर गांव के जंगल की झाडिय़ों में फेंक दिया था। उधर जब बच्ची देर शाम तक नहीं मिली तो स्वजन ने खोजबीन शुरू की थी। परेशान स्वजन व ग्रामीणों ने रात करीब दस बजे घटना को लेकर बांदा-कानपुर हाईवे पर जाम लगा दिया। पुलिस ने परिजनों को काफी समझाया। एसपी पलाश बंसल ने तीन टीमें गठित कर बच्ची की तलाश शुरू कराई। शक के आधार पर सुनील को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई तो उसने वारदात कबूल करते हुए बच्ची को जंगल से बरामद कराया। इसके तुरंत बाद आरोपी ने फायरिंग कर भागने का प्रयास किया तो पुलिस ने पैर में गोली मारकर उसे गिरफ्तार कर लिया था। उधर रात 2:35 बजे पुलिस मासूम को लेकर जिला अस्पताल पहुंची। उसकी हालत नाजुक देख करीब सवा चार बजे मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया। न्यूरो और पीडियाट्रिक डॉक्टर के न होने, मासूम की हालत नाजुक और बार-बार झटके आते देख दोपहर 12 बजे कानपुर रेफर कर दिया गया। हैलट अस्पताल के पीडियाट्रिक वार्ड में पांच विशेषज्ञों की टीम की निगरानी में मामूस का इलाज चल रहा था। डॉक्टरों के मुताबिक पूरे शरीर और जननांग में चोट होने की वजह से संक्रमण फैलता गया। इसके चलते मासूम की मौत हो गई। बच्ची से दरिंदगी करने का आरोपी सुनील निषाद उस समय शक के घेरे में आ गया था, जब ग्रामीणों ने उसके कपड़ों में खून लगा देखा। हालांकि तब उसने कहा कि वह गिर गया था। इस वजह से चोट आई है पर उसके शरीर पर कहीं भी चोट के निशान नहीं थे। पुलिस जब पहुंची तो ग्रामीणों ने उस पर शक जताया। इस पर पुलिस ने सुनील के मछली वाले उस आइस बॉक्स को चेक किया, जिसमें वह बच्ची को भरकर जंगल में फेंक आया था। बॉक्स में खून के निशान और मल मिला तो पुलिस ने उससे सख्ती से पूछताछ की। इसके बाद उसने घटना कबूल की थी। आरोपित सुनील निषाद ने मछलीवाले आइस बॉक्स में रखकर मासूम को मरणासन्न हालत में पदार्थपुर जंगल में फेंका था। शाम करीब छह बजे वह साइकिल के कैरियर पर मछली वाला आई बॉक्स रखकर घर लौटा। उस वक्त भी नशे में धुत था। मासूम की खोजबीन में जुटे आसपास के लोगों ने उसके कपड़े में खून लगा देखा तो रोककर पूछा तो उसने गिरने की बात बताई। हालांकि, शरीर पर कहीं भी चोट के निशान नहीं दिखाई दिए। घटना को लेकर स्वजन व ग्रामीणों में आक्रोश है। उनका कहना है कि दरिंदगी करने वाले आरोपित फांसी की सजा दी जाए। उसके घर में बुलडोजर चलाया जाए। उसे गांव में घुसने की कभी भी अनुमति न दी जाए। आरोपित के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई होने से मासूम को सही न्याय मिल सकेगा।

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