गृहस्थ आश्रम को वेदों में दिया गया बहुत महत्वपूर्ण स्थान: धीरज

फर्रुखाबाद, समृद्धि न्यूज। आर्य समाज कमालगंज के तत्वावधान में चल रहे श्रवणी वेद प्रचार अभियान के अंतर्गत कमालगंज क्षेत्र के गांव गदनपुर देवराजपुर में सामूहिक सत्संग का आयोजन किया गया। सामूहिक यज्ञ का आयोजन हुआ। जिसमें यजमान धीरज ने बताया कि वेद हमें सिखाते हैं कि गृहस्थ जीवन कोई बाधा नहीं, बल्कि मोक्ष तक पहुंचने का एक साधन है, यदि उसे धर्म, कर्तव्य और संयम के साथ जिया जाए। इसलिए वेदों से आदर्श गृहस्थ बनने की शिक्षा हमें व्यावहारिक और आध्यात्मिक दोनों स्तर पर मिलती है। वेद न केवल आध्यात्मिक ज्ञान का स्रोत हैं, बल्कि वे जीवन के हर क्षेत्र में संतुलन और सदाचार की प्रेरणा भी देते हैं। गृहस्थ आश्रम को वेदों में बहुत महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है, क्योंकि यह समाज की नींव है। ऋग्वेद कहता है कि गृहस्थ को अपने माता-पिता, पत्नी, संतान, अतिथि और समाज के प्रति अपने कर्तव्यों का पालन ईमानदारी से करना चाहिए। गृहस्थ को न तो भोग में डूबना चाहिए और न ही कठोर तपस्वी बनना चाहिए। संतुलित और संयमित जीवन ही श्रेष्ठ है। गृहस्थ को अपने परिवार के पालन हेतु परिश्रम से कार्य करना चाहिए और आलस्य से दूर रहना चाहिए। आर्य समाज के प्रधान हरि सिंह आर्य ने आये हुए अतिथियों का सत्कार कर वैदिक साहित्य भेंट कर उनका सत्कार किया। कार्यक्रम में मुकुल यादव, रितुल यादव, तेजस्वी यादव, हर्षित यादव, राजवीर सिंह, जगदीश यादव, रेखा देवी आदि उपस्थित रहे।

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