शहर के प्रतिष्ठित एसएसबी इंटर कॉलेज के वार्षिक समारोह में बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए प्रदेश के संसदीय कार्य मंत्री। अमिताभ श्रीवास्तव।
समृद्धि न्यूज़ अयोध्या। प्रदेश के वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने कहा कि टाइम मैनेजमेंट जीवन में होना बेहद आवश्यक होता है।उन्होंने कहा कि यदि व्यवस्थित योजना बनती है और वह कार्य व्यवहार और आचरण में आती है तब सफलता अवश्य मिलती है।श्री खन्ना जिले के प्रतिष्ठित एसएसबी इंटर कॉलेज के वार्षिक समारोह को बतौर मुख्य अतीत संबोधित कर रहे थे।उन्होंने कहा कि जिन्होंने सफलता के लिए समय का ध्यान रखा, उन्हें सफलता अवश्य मिली।ऐसे में टाइम मैनेजमेंट बेहद आवश्यक है।

सर्वपल्ली डॉ राधाकृष्णन का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा की शिक्षा का उद्देश्य शिक्षा देने के लिए होना चाहि। उससे मन को शांति और मस्तिष्क को ज्ञान प्राप्त होता हैम उन्होंने कहा कि यह अभिभावक की जिम्मेदारी है कि वह छात्रों में उत्कृष्ट विचार समाहित कराए। उन्होंने अभिभावकों से अपील की की बच्चों को भाग्य और मुकद्दर के सहारे जीवन जीने के लिए प्रेरित न करें,बल्कि उन्हें कार्य और व्यवहार करने के लिए प्रेरित करें जिससे वह ज्ञान प्राप्त करें और सफलता प्राप्त कर सके। उन्होंने अभिभावकों को प्रेरित करते हुए कहा कि अपने संरक्षण में अच्छे संस्कार दें।अच्छी आदतें सिखाएं।बच्चे देखकर सीखते हैं ऐसे में उन्हें वह परिवेश दें जिसको देखकर वह सुयोग्य नागरिक बन सके।उन्होंने धार्मिक ग्रंथ गीता की चर्चा करते हुए कहा कि जीवन जीने की कला यदि सीखनी हो तो गीता ग्रंथ से सीखें। जीवन में कुछ भी अस्थाई नहीं है।पुरुषार्थ यदि 80 फ़ीसदी होगा तो 20 फ़ीसदी ईश्वर साथ दे सकता है लेकिन 80 फ़ीसदी पुरुषार्थ में स्थान कर्म का सरवोपरि है।उन्होंने गीता के विभिन्न अध्यायों और श्लोक का भी वर्णन किया।अयोध्या में भगवान श्री राम की प्राण प्रतिष्ठा पर उन्होंने कहा कि यह संकल्प शक्ति थी जिसकी वजह से यह सफलता मिली है।उन्होंने कहा कि यदि किसी के द्वारा हिंदुस्तान को मिटाने के प्रयास का जिक्र इतिहास में होगा तो राम मंदिर बनाने का जिक्र भी इतिहास में स्वर्णिम अक्षरों में लिखा जाएगा।

समारोह की अध्यक्षता कर रहे उत्तर प्रदेश प्रधानाचार्य परिषद के संरक्षक श्रीनिवास शुक्ला ने कहा कि धरती पर पैदा होने वाला सभी व्यक्ति वंदनीय होता है उसमें जब राम समाहित होते हैं,तो उसकी महत्ता बढ़ जाती है।उन्होंने सभी को एक समान भाव से देखने और उत्कृष्ट कार्य करने के लिए प्रेरित किया।स्वागत संबोधन प्रस्तुत करते हुए प्रधानाचार्य डॉ. मणि शंकर तिवारी ने कहा कि जीवन में सफलता तभी परिलक्षित होती है जब उसमें सतत विकास होता रहे।उन्होंने हो रहे विकास की संभावनाओं की सार्थकता पर भी अपनी बात कही।उन्होंने छात्रों को प्रेरित किया हुए शिक्षा प्राप्त कर यूं ही देश और प्रदेश का नाम गौरवान्वित करते रहे।अतिथियों ने सात सौ छात्रों की क्षमता का राघव सभागार और रूफ़ टॉप पावर सोलर प्लांट का लोकार्पण किया।इसके पहले विद्यालय के शिक्षक डॉ. देवेंद्र कुमार मिश्रा ने विद्यालय के इतिहास पर प्रकाश डाला।समारोह का संचालन विद्यालय के शिक्षक विवेकानंद पाण्डेय और उनके नेतृत्व में छात्र सुशांत सिंह और शशांक त्रिपाठी ने किया।धन्यवाद ज्ञापन शिक्षा अभिभावक संघ के अध्यक्ष डॉ घनश्याम यादव ने किया।मुख्य अतिथि खन्ना सहित सभी अतिथियों ने विद्यालय की पत्रिका सौरभ का विमोचन किया। विद्यालय के प्रबंधक पुनीत मेहरोत्रा,प्रधानाचार्य डॉ तिवारी व सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य डॉ वीरेंद्र कुमार त्रिपाठी ने मुख्य अतिथि वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश खन्ना,समारोह अध्यक्ष संरक्षक उत्तर प्रदेश प्रधानाचार्य परिषद श्रीनिवास शुक्ला,बीकापुर विधायक डॉ अमित सिंह चौहान, जिला विद्यालय निरीक्षक डॉ राजेश कुमार आर्य,प्रधानाचार्य परिषद के प्रदेश महामंत्री डॉ रविंद्र त्रिपाठी और माध्यमिक शिक्षा के वित्त एवं लेखाधिकारी वीरेश वर्मा सहित प्रधानाचार्य राजकीय इंटर कॉलेज डॉ सुरेंद्र नाथ तिवारी,राम निहोर, प्रधानाचार्य राम प्रिया शरण सिंह, डॉ रामकृष्ण मिश्रा,त्रियुग नारायण तिवारी व सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य डॉ राम सुरेश मिश्रा को मंच से सम्मानित किया।इस दौरान विद्यालय के छात्रों ने मोटिवेशनल सॉन्ग,बसंती गीत, कविता पाठ,लोकगीत,भजन, पखवाज वादन और कव्वाली की शानदार प्रस्तुति की।प्रमुख रूप से साकेत महाविद्यालय के प्रधानाचार्य डॉ अभय कुमार सिंह, मनूचा महिला महाविद्यालय की प्रधानाचार्य डॉ मंजूषा मिश्रा, शिक्षक अभिभावक संघ के पूर्व अध्यक्ष रमाकांत पांडेय,जसराज वर्मा,विभिन्न विद्यालयों के प्रधानाचार्य,शिक्षक और छात्र मौजूद रहे।इस दौरान छात्रों को विभिन्न पुरस्कार प्रदान किए गए जिसमें निबंध प्रतियोगिता, वाद विवाद,भाषण,सुलेख,हिंदी श्रुति लेख,अंताक्षरी,काव्य पाठ, संगीत,स्काउट,खेलकूद और खेल में उत्कृष्ट प्रोत्साहन शामिल रहा।
