वादिनी से सांठगांठ कर गलत रिपोर्ट देने के मामले में न्यायालय ने ठहराया दोषी
फर्रुखाबाद, समृद्धि न्यूज। गलत मेडिकल परीक्षण रिपोर्ट देने के मामले में न्यायालय ने महिला चिकित्सक व वादिनी को को दोषी करार देते हुए सजा व जुर्माना से दंडित किया।वादिनी शकुंतला देवी ने 20 फरवरी 2023 को न्यायालय में परिवार प्रस्तुत किया था। जिसमें दर्शाया उसको हरिजन आबादी के अनुसार ग्राम प्रधान द्वारा ०.०२ डि0 का आवासीय पट्टा किया था, जिस पर उसका मकान बना हुआ है वह झोपड़ी पड़ी हुई है। गांव के भगवान दास उर्फ भगन्ने लाल, बृजेश व शिवानी ने मिलकर आवासीय भूमि का फर्जी प्रपत्र तैयार कर अपने नाम डेढ़ बीघा रकवा कृषि भूमि का पट्टा नियम विरुद्ध है। आवासीय भूमि में केवल आवासीय पट्टे को ही दिया जा सकता है। जिसका अधिकतम रकवा ०.०३ डी तक हो सकता है। इसी के चलते आरोपीगण गाली गलौज मारपीट करते रहते हैं। 14 फरवरी को रात्रि 7 से 8 बजे विपक्षियों ने एक राय होकर मेरे घर में घुस आए और मारपीट की तथा कपड़े फाड़ दिए। घर में आग लगाने का असफल प्रयास किया और घर में रखी ३० हजार रुपये घरेलू बर्तन आदि लूट लिये। चीखपुकार करने पर गांव के बालक राम, शौकीन आ गये, जिन्होंने बचाया। लोहिया अस्पताल में चोंटो का परीक्षण किया गया, परंतु कोई कार्रवाई नहीं हुई। डॉक्टरी परीक्षण रिपोर्ट में उल्लेख किया गया कि वादिनी की सभी चोटों पर काले रंग के धब्बे होना दर्शाया गया है, जबकि सामान्य तौर पर काले रंग के निशान 4 से 7 दिन के पश्चात ही प्रारंभ होते हैं। जिससे वादिनी द्वारा प्रस्तुत मेडिकोलीगल संदेह प्रतीत हुआ और न्यायालय द्वारा वादिनी से अपनी कोहनी के ऊपर वाले भाग के दोनों हाथों की चोट दिखाने को कहा गया तो न्यायालय के समक्ष दिखाए, परंतु चोटों के कोई निशान नहीं थे। पूछे जाने पर कहा कि उसके निशान खत्म हो चुके हैं। वादिनी के हाथों में चोटों का कोई निशान नहीं दिख रहे हैं और उसने न्यायालय में स्वीकार किया कि उसकी गर्दन अथवा कंधे पर अब कोई चोटों का कोई निशान नहीं है। इससे प्रतीत होता है कि 16 फरवरी 2023 को तैयार प्रश्नगत चिकित्सकीय आख्या इस मुकदमे को बल देने हेतु तैयार की गई है और यह वास्तव में मिथ्या साक्ष्य करने का प्रयास प्रतीत होता है, जो एक गंभीर अपराध है। इस मामले में 16 फरवरी 2023 को चिकित्सीय परीक्षण करने वाले डॉक्टर के विरुद्ध कार्रवाई पंजीकृत किए जाने तथा मुख्य चिकित्साधिकारी को वादिनी शकुंतला देवी की चोटों का परीक्षण डाक्टरों की तीन पैनल से कराये जाने का आदेश दिया। २२ फरवरी को परीक्षण हुआ। जिसमें कोई चोटें के निशान नहीं थे, परंतु डॉ0 कीर्ति कनौजिया द्वारा मुकदमे में लाभ पहुंचाने के लिए गलत रिपोर्ट तैयार की। न्यायालय में वादिनी शकुंतला देवी, चिकित्सक कीर्ति कनौजिया के विरुद्ध धारा 344 के तहत दंड कार्रवाई पंजीकृत की गई तथा धारा 344 में अभियुक्बत को समन जारी करने का आदेश दिया। इसके उपरांत वादिनी शकुंतला पत्नी लखन सिंह निवासी सलेमपुर दूंदेमई कायमगंज, डॉ0 कीर्ति कनौजिया पत्नी रमेशचन्द्र कनौजिया निवासी सेक्टर बी बसंतकुंज थाना दुबग्गा लखनऊ द्वारा 13 अप्रैल को जमानत कराई गई। विशेष न्यायाधीश द0प्र0क्षे0अपर सत्र न्यायाधीश कृष्ण कुमार ने दोषसिद्ध शकुंतला को धारा 193 सपठित धारा 344 के अंतर्गत ढाई माह का कारावास व मुआवजा के तौर पर 500 के अर्थदंड से दंडित किया। अदा ना करने पर एक सप्ताह का अतिरिक्त कारावास भोगेगी। दोष सिद्ध डॉ0 कीर्ति कनौजिया को धारा 193 सपठित 344 के अंतर्गत दो माह का कारावास 500 रुपये का अर्थदंड से दंडित किया। अदा न करने पर एक सप्ताह का अतिरिक्त कारावास की सजा भुगतनी होगी। इसके साथ ही सरकारी अस्पतालों में मेडिकोलीगल की प्रक्रिया में सुधार किया जाना चाहिए और ऐसे डॉक्टरों को ही मेडिकोलीगल के कार्य में लगाया जाना चाहिए जिनकी सत्यनिष्ठा वास्तव में संदेश से परे हो। अत: इस आदेश की एक प्रति आवश्यक कार्रवाई हेतु स्वास्थ्य महानिदेशक उत्तर प्रदेश लखनऊ, मुख्य चिकित्साधिकारी फर्रुखाबाद को भेजी गई है।
महिला चिकित्सक को दो माह व वादिनी को ढाई माह का कारावास
