फर्रुखाबाद, समृद्धि न्यूज। वैदिक धर्म व वेदों के प्रचार प्रसार हेतु आर्य समाज कमालगंज के तत्वावधान में आयोजित वेद प्रचार अभियान यात्रा गंगापार क्षेत्र के गांव भरखा सलेमपुर में पहुंची। ग्रामीणों ने बड़े ही उत्साह से आर्य विद्वानों का स्वागत किया। आयोजित लोक कल्याण यज्ञ में बड़ी ही श्रद्धाभाव के साथ ग्रामवासियों ने आहुतियां प्रदान कर परमेश्वर से सुख-समृद्धि की कामना की। यज्ञ के उपरांत सभा का आयोजन किया गया। जिसमें विद्वानों ने ग्रामीणों का मार्गदर्शन किया। कार्यक्रम के संयोजक आचार्य संदीप आर्य ने आर्य समाज के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आर्य समाज का सनातन एकता में महत्वपूर्ण योगदान है। स्थापना महर्षि दयानंद सरस्वती ने 1875 में की थी, ये भारत में धार्मिक, सामाजिक और राष्ट्रीय एकता की भावना को सशक्त करने वाला एक प्रभावशाली आंदोलन रहा है। इसका उद्देश्य केवल धार्मिक सुधार ही नहीं, बल्कि समाज को जाति पांति, अंधविश्वास और सामाजिक भेदभाव से मुक्त करके एकजुट करना था। आर्य समाज ने सनातन धर्म की मूल शिक्षाओं को पुनस्र्थापित करके समाज में धार्मिक, सामाजिक और राष्ट्रीय स्तर पर एकता की नींव रखी। आज भी आर्य समाज का यह योगदान एक प्रेरणा है, जो भारत की विविधता में एकता के आदर्श को साकार करता है। आचार्य रामप्रकाश ने रक्षाबंधन के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि ये दिन रक्षासूत्र धारण और यग्योपवित बदलने का दिन होता है। आचार्य राम रहीस ने कहा कि पुरोहित समाज का नेत्र होता है, इसलिए हमेशा योग्य और पढ़े लिखे वैदिक पुरोहित से ही संस्कार कराने चाहिए। रमेश आर्य ने कहा कि समाज मे व्याप्त कुरीतियों और पाखण्डों को त्याग कर बच्चों को संस्कारयुक्त शिक्षा व धार्मिक संस्कार देकर आने वाली पीढिय़ों का भविष्य सुधारा जा सकता है। बच्चों के लिए धर्म ज्ञान की प्रतियोगिता भी आयोजित की गई। जिसमें विजयी प्रतिभागियों को पुरस्कार प्रदान किये गए, ईनाम पाकर बच्चों के चेहरे खिल गए। आचार्य गेंदन सिंह आर्य ने संचालन किया। कार्यक्रम में वीरेंद्र सिंह, श्रीपाल कुशवाह, शिवसिंह, सूरज पाल, अमर सिंह, बलराम कुशवाह, सौरभ, नरेंद्र, हरपाल, सौम्या, दीक्षा, कोमल, रुचि आदि उपस्थित रहे।
यज्ञ में आहूतियां देकर ग्रामीणों ने ईश्वर से सुख-समृद्धि की कामना
