फर्रुखाबाद, समृद्धि न्यूज। भारतीय महाविद्यालय के असिस्टेंट प्रो0 डा0 रमाशंकर पाण्डेय ने मताधिकार के बारे में बताया कि जिस देश में जितने अधिक नागरिकों को मताधिकार प्राप्त रहता है, उस देश को उतना ही अधिक जनतांत्रिक समझा जाता है। हमारा देश संसार के जनतांत्रिक देश में सबसे बड़ा है, क्योंकि हमारे यहां मताधिकार प्राप्त नागरिकों की संख्या विश्व में सबसे बड़ी है। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 326 एक सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार को निर्वाचित सरकार के सभी स्तरों के चयन के आधार के रूप में परिभाषित करता है। सार्वजनिक मताधिकार के अन्तर्गत सभी नागरिक जो 18 वर्ष और उससे अधिक आयु के हैं बिना जाति, शिक्षा, धर्म, रंग, प्रजाति और आर्थिक स्थिति का भेदभाव किए हुए वोट देने के लिए स्वतंत्र होते हैं। सभी नागरिकों को देश के संविधान द्वारा प्रदत्त सरकार चलाने के हेतु अपने प्रतिनिधि निर्वाचित करने के अधिकार को ही मताधिकार कहा जाता है। जनतांत्रिक प्रणाली में इसका सबसे अधिक महत्व होता है, किसी भी लोकतंत्र की नीव मताधिकार पर ही रखी जाती है। इस प्रणाली पर आधारित समाज व शासन की स्थापना के लिए आवश्यक है कि प्रत्येक वयस्क नागरिक को बिना किसी भेदभाव के मत का अधिकार प्रदान किया जाए। भारतीय संविधान ने धर्मनिरपेक्षता का सिद्धांत अपनाते हुए व्यक्ति की महत्ता को स्वीकार किया है। तथा अमीर, गरीब के अंतर को, धर्म, जाति एवं संप्रदाय के अंतर को तथा स्त्री-पुरुष के अंतर को समाप्त कर प्रत्येक वयस्क नागरिक को देश की सरकार बनाने के लिए अपना प्रतिनिधि निर्वाचित करने के लिए मत देने का मूल अधिकार प्रदान किया है। अत: हम सभी का यह अधिकार एवं संवैधानिक उत्तरदायित्व है कि हम अपने लोकतंत्र के इस महापर्व में अपने मताधिकार का प्रयोग कर सरकार के निर्माण में अपनी प्रतिभागिता सुनिश्चित करेंगे।
जनतांत्रिक प्रणाली में मताधिकार का सबसे अधिक महत्व होता है: प्रो0 रमाशंकर पाण्डेय
