फर्रुखाबाद, समृद्धि न्यूज। श्री पांडेश्वर नाथ मंदिर में चल रही श्री शिव महापुराण की कथा के द्वितीय दिवस के अवसर पर वृंदावन से पधारे कथा व्यास पंडित ज्ञानेश महाराज ने प्रवचन करते हुए कहा कि हम मानवों को स्वयं का मूल्य पहचानना होगा। हमें एक भी श्वास बर्बाद नहीं करनी है। यह जीवन क्षणभंगुर है पता नहीं कब समाप्त हो जाए। इसलिए प्रत्येक क्षण हरि नाम का स्मरण करते रहो। हमे ंये यह जीवन केवल भोग के लिए नहीं मिला है बल्कि योग साधना के लिए मिला है। कलयुग में बहुत दोष होंगे परंतु कलयुग का एक बहुत उत्तम गुण भी है। कलयुग केवल नाम अधारा, सुमरि सुमरि नर उतरही पारा। हमें ऐसा अभ्यास करना होगा की हमारे अंतिम क्षण में नारायण की स्मृति बनी रहे। जिसके जीवन के अंतिम क्षण में मुख में परमात्मा का नाम नहीं आ पाया वह जीवन कचरे के समान हो जाता है। हमें इस संसार के झमेले में पडक़र, झूठे प्रपंचों में पडक़र परमात्मा रूपी रत्न को प्राप्त करने का परम उद्देश्य नहीं भूलना चाहिए। जीवन के अंत में हमारे सत्कर्म ही, हमारा नाम जप ही हमारे काम आएगा। यह संसार तो गुण और दोष मय है। हमें ऐसे साधन करने होंगे जिससे इस दुखमय संसार को पार कर कर जाएं। आगे बताया की शिवभक्त वही हैं जिसके हृदय में जगत व अपनों के साथ ही नहीं, बल्कि अपने दुश्मनों के प्रति भी कल्याण का भाव रहता हो और यही कल्याण का भाव ही हमारी सनातनी परंपरा की पहचान है। सम्पूर्ण विश्व में केवल सनातन धर्म ही कहता है की सभी सुखी हों सभी शांतिपूर्वक रहे, सबका मंगल हो, चारों ओर शांति हो, परंतु आज विडंबना है दुनिया में कुछ राक्षसी मत के अनुयायियों द्वारा अत्याचार इस कदर बढ़ रहा है की संपूर्ण दुनिया त्राहि त्राहि कर उठी है। बांग्लादेश इसका ज्वलंत उदाहरण है। क्या वहां के निरपराध हिंदुओं की लुटती अस्मिता छोटे-छोटे बच्चों पर अत्याचार बहन बेटियों के साथ दरिंदगी क्या इसे धर्म कहते हैं। इन विधर्मियों द्वारा अत्याचार का जिस दिन हिंदू जनमानस ने प्रतिकार करना आरंभ कर दिया, तो यह कट्टरपंथी क्षण भर में मिट्टी में मिल जाएंगे। इस मौके पर डॉ0 रमाकांत तिवारी, प्रमोद झा, धीरेंद्र वर्मा, रंजना झा, रीना राजपूत, अनीता तिवारी, मृदुल तिवारी, रोमा तिवारी, गोविंद अवस्थी, आशुतोष अवस्थी, भप्पू सोनी, कैलाश मिश्रा, सलिल अग्रवाल, राजेंद्र त्रिपाठी, विश्राम सिंह राजपूत, प्रवीन पाल, धीरेंद्र वर्मा आदि उपस्थित रहे। आज के मुख्य यजमान वीरेन्द्र मिश्र रहे।
हम मानवों को स्वयं का मूल्य पहचानना होगा-ज्ञानेश महाराज
