अंतर्राज्यीय गिरोह का पर्दाफाश,पांच अभियुक्त गिरफ्तार,जांच शुरू
समृद्धि न्यूज़ अयोध्या। जिले की थाना पूरा कलंदर पुलिस, एसओजी और सर्विलांस की संयुक्त टीम ने कूटरचित दस्तावेजों के सहारे फर्जी जमानत सत्यापन रिपोर्ट तैयार करके जमानत कराने वाले अंतर्राज्यीय गिरोह का पर्दाफाश कर बस्ती जिले के निवासी भीम प्रकाश शाही, सर्वेश कुमार,रवींद्र पाल, शंभूनाथ व पवन कुमार नामक पांच अभियुक्तों की गिरफ्तारी का दावा किया है।इनमें से चार अभियुक्तों का आपराधिक इतिहास है।गिरफ्तार किए गए अभियुक्तों के पास से विभिन्न थानों से जमानतदार की सत्यापित 57 कूटरचित जमानत सत्यापन रिपोर्ट,विभिन्न तहसीलों से 25 हैसियत सत्यापन की कूटरचित रिपोर्ट,एक फाइल जिसमें जमानतदार की हैसियत व सकूनत सत्यापन आख्या के खाली प्रोफार्मा व चरित्र प्रमाण पत्र हेतु आवेदन पत्र,पीले रंग का लिफाफा जिस पर विभिन्न मुकदमों से संबंधित व्यक्तियों की सत्यापन रिपोर्ट,एक रजिस्टर जिसमें बहुत से मुकदमों के अभियुक्तों के जामिदारों के नाम,पता,सकूनत हस्तलेख में लिखा गया है तथा जिसमें से कुछ नाम,पता वल्दियत सकुनत पर क्रॉस का निशान लगाया गया है व एक सूची जिसमें विभिन्न मुकदमों से संबंधित जमानतदारों का सत्यापन अंकित है,विभिन्न व्यक्तियों के पासपोर्ट साइज की 169 फोटो,सफेद रंग के सादे 24 लिफाफे,तीन पीले रंग के लिफाफे,15 भूरे रंग के लिफाफे,एक फाइल जिसमें थाना इनायतनगर से संबंधित अभियोग के अभियुक्त की सत्यापन आख्या,एक फाइल में थाना कोतवाली नगर से संबंधित अभियोग के अभियुक्त की सत्यापन आख्या,एक नीले रंग के पन्नी बैग में दो इंक पैड, 04 पेन व विभिन्न जनपदों के न्यायालय,जिलाधिकारी थानो व तहसीलों की 105 मोहरें,एक मोबाइल नोकिया कीपैड मोबाइल,दो मोटरोला एंड्रॉयड फोन,एक एचएमडी कीपैड मोबाइल तथा एक नीले रंग का एंड्रॉयड फोन बरामद किया गया है।इस गिरोह का पर्दाफाश करने वाली संयुक्त टीम को एक लाख रुपए का पुरस्कार दिए जाने की घोषणा की गई है।
खुलासे की कहानी, एसएसपी की जुबानी
इस अंतर्राज्यीय गिरोह की कहानी मीडिया के साथ साझा करने के लिए आयोजित प्रेसवार्ता को संबोधित करते हुए एसएसपी डॉ गौरव ग्रोवर ने बताया कि थाना पूराकलंदर के एक मुकदमे से संबंधित फर्जी और कूटरचित जमानत पत्र तैयार कर अभियुक्तों की जमानत कराने वाले ग्रहों के पांच लोगों को गिरफ्तार किया गया है।जिले में गैंगस्टर एक्ट व अन्य मुकदमों से संबंधित अभियुक्त व अंतर्राज्यीय स्तर की गैंग का सरगना अभियुक्त राजा मानसिंह जो कि जेल में निरुद्ध है,उसका एक सहयोगी उपदेश यादव है जिसके ऊपर 17 मुकदमे दर्ज हैं,वह एक मुकदमे में जेल में निरुद्ध था।कुछ दिन पूर्व न्यायालय से उसकी जमानत हो गई।इस दौरान यह सूचना मिली कि जमानत में जो प्रपत्र दाखिल किए गए हैं,वह कूटरचित है और बिना वास्तविक जमानतदारों के उसके सहयोगियों द्वारा एक गिरोह के माध्यम से कूटरचना करके माननीय न्यायालय में फर्जी जमानत पत्र दाखिल करते हुए उसकी जमानत प्राप्त की गई है।इस संबंध में सीओ अयोध्या से जांच कराई गई तो जमानत प्रपत्र और जमानतदार बस्ती के पाए गए।जब संबंधित थाने, तहसील व प्रधान जिनके द्वारा इसे तस्दीक किया जाना था, उनसे इस संबंध में बयान लिया गया तो पता चला कि जमानत परिपत्र कभी भी संबंधित थाना, तहसील व ग्राम प्रधान के पास तस्दीक होने के लिए गया ही नहीं।न्यायालय से किसी के द्वारा इसे प्राप्त कर कूटररचित ढंग से इसे अपने पास से ही संबंधित थाना प्रभारी तहसीलदार और ग्राम प्रधान की मोहर लगाकर उसे पर हस्ताक्षर कर फर्जी प्रपत्र तैयार कर लिया गया और न्यायालय में प्रस्तुत कर दिया गया जिससे कि उस अभियुक्त की जमानत हो गई।इस संबंध में थाना पूराकलंदर पर एक अभियोग पंजीकृत किया गया जिसकी विवेचना के दौरान यह पता चला कि एक ऐसा गिरोह है जो कि बस्ती जनपद में सक्रिय है।इस गिरोह का मुख्य अभियुक्त व सरगना भीम प्रकाश शाही है।इसके सहयोगी पवन कुमार,शंभूनाथ,रवींद्र पाल व सर्वेश कुमार है।इसमें सर्वेश कुमार द्वारा अभियुक्त उपदेश यादव की जमानत कराने के लिए लगातार उससे जेल में मुलाकात करते हुए इस गिरोह के माध्यम से जमानत कराई गई है।जमानत के तौर पर सौ से भी ज्यादा विभिन्न राजपत्रित अधिकारियों और न्यायालयों की मुहर सहित अन्य कूटरचित प्रपत्र मिले हैं।इस गिरोह के सदस्य अपने स्थान पर बैठकर ही विभिन्न लोगों के संपर्क में रहते थे,जैसे ही कोई जमानत परिपत्र तस्दीक के लिए आता था,ये संबंधित थाने के थाना प्रभारी,तहसीलदार व ग्राम प्रधान के नाम व अन्य चीजों की जानकारी कर वहां उन परिपत्रों के जाए बिना ही अपने घर पर बैठकर ही उन्हें सत्यापित करके फर्जी तरीके से संबंधित व्यक्ति को दे देते थे जिससे कि न्यायालय पर उसे प्रस्तुत करके अभियुक्त की जमानत हो सके। इन अभियुक्तों की जमानत के साथ-साथ जो भी परिपत्र इनके पास मिले हैं,वे जिस भी मुकदमे से संबंधित है और जहां-जहां वो मुकदमे दर्ज हुए हैं,वहां के थाना प्रभारियों और अधिकारियों को एक रिपोर्ट भेजी जा रही है जिससे कि यदि अन्य मुकदमों में फर्जी जमानत परिपत्र प्रयोग हुए हैं तो जांच करके विधिक कार्रवाई की जा सके।इस संबंध में एक रिपोर्ट माननीय न्यायालय को भी भेजी जा रही है जिससे कि इस पूरे घटनाक्रम और इस गिरोह की जानकारी माननीय न्यायालय को हो सके और कोई भी अभियुक्त फर्जी दस्तावेजों और सत्यापन के जरिए जमानत न करा सके। इसके साथ ही इस बात की भी जांच की जा रही है कि इस गिरोह को आर्थिक सहायता और संरक्षण देने वाले लोग कौन हैं?इसके लिए एसपी सिटी और एसपी ग्रामीण को अपने अपने क्षेत्रों में थाना प्रभारी से जांच कराके रिपोर्ट मांगने के निर्देश दिए गए हैं।प्रेसवार्ता के दौरान सहायक पुलिस अधीक्षक देवेश चतुर्वेदी,एसपी सिटी चक्रपाणि त्रिपाठी,एसपी ग्रामीण बलवंत कुमार चौधरी सहित अन्य लोग मौजूद रहे।
जांच व एफआईआर का सिलसिला शुरू
एसएसपी डॉ ग्रोवर की माने तो मीडिया के साथ आज जो कुछ साझा किया गया है,वह प्राथमिक है।अभियुक्तों की गिरफ्तारी के बाद अब जांच, एफआईआर और पर्दे के पीछे छिपे सहयोगियों और संरक्षण दाताओं के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।उन्होंने बताया कि जिन भी प्रभारियों और अधिकारियों के नाम व पद की मोहरें मिली है उन्हें लिखित सूचना भेजी जा रही है जिससे वे इसका सत्यापन करा सके कि अब तक कितने मामलों में उनके नाम व पद की मोहर का दुरुपयोग किया गया है?ऐसे जितने भी मामले मिलेंगे,उन सभी मामलों में एफआईआर दर्ज कराई जाएगी।
