महिला एसआई ने फर्जी निस्तारण करने के लिए महिला को थाने में बुलाकर धमकाया
पीलीभीत। एक तरफ उत्तर प्रदेश में नारी शक्ति के सम्मान और सुरक्षा को लेकर ‘मिशन शक्ति’ अभियान के ढोल पीटे जा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ पूरनपुर की पुलिस की संवेदनहीनता ने इस अभियान की ज़मीनी हकीकत पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ताजा मामले में, पूरनपुर कोतवाली क्षेत्र में एक महिला के घर में घुसकर उसके साथ मारपीट और लूटपाट की गई, लेकिन पुलिस ने 24 घंटे बीत जाने के बाद भी प्राथमिकी (FIR) दर्ज करना तक उचित नहीं समझा, जिससे पीड़िता न्याय के लिए दर-दर भटकने को मजबूर है।
पति हैं बाहर, घर में घुसकर जानलेवा हमला और लूट
मामला पूरनपुर देहात के मोहल्ला नूरी नगर का है। पीड़िता रूबी (पत्नी राशिद) ने कोतवाली पूरनपुर में दी गई तहरीर में बताया कि उनके पति काम के सिलसिले में बाहर गए हुए हैं। बीते 25 सितंबर 2025 की देर रात करीब 11 बजे, महिलाओं के बीच हुए एक पुराने मामूली विवाद को लेकर मोहल्ले के चार लोग – सोनू, मो० शफीक, रूकसार और नूरी – डंडे लेकर जबरन उनके घर के कमरे में घुस आए।
पीड़िता के अनुसार, आरोपियों ने उन्हें गंदी-गंदी गालियाँ दीं और लात-घूसों तथा डंडों से जमकर मारा-पीटा। इस दौरान आरोपियों ने बिस्तर पर रखा उनका बटुआ चोरी कर लिया, जिसमें ₹ 1280/- नकद और सोने के कान के बुंदे रखे थे। मारपीट की भगदड़ में पीड़िता की नाक का सोने का फूल भी कहीं गुम हो गया।
जान से मारने की धमकी और पुलिस का टालमटोल
रूबी ने बताया कि शोर-शराबा सुनकर आस-पास के लोगों के इकट्ठा होने से उनकी जान बच सकी, वरना आरोपी उन्हें जान से मार देते। जाते-जाते हमलावरों ने पीड़िता को यह धमकी भी दी कि “तेरे पति के आने से पहले हम तुझे जान से मार देंगे।”
पीड़िता ने 26 सितंबर 2025 को कोतवाली में लिखित शिकायत दर्ज कराते हुए खुद को भयभीत बताया और आरोपियों से जान-माल के खतरे की आशंका जताई।
न्याय के लिए घिस रही एड़ियाँ: महिला इंस्पेक्टर पर फर्जी फोटो का आरोप
पीड़िता का आरोप है कि इस गंभीर आपराधिक मामले में त्वरित कार्रवाई करने या एफआईआर दर्ज करने के बजाय, कोतवाली पूरनपुर पुलिस ने संवेदनहीनता दिखाई। पीड़िता ने यह भी बताया कि एक महिला इंस्पेक्टर ने फर्जी तरीके से उनकी फोटो खींचकर उन पर राजीनामे का दबाव बनाने की कोशिश की।
गंभीर मारपीट, घर में घुसपैठ, लूट और जान से मारने की धमकी जैसे संगीन अपराधों पर भी पुलिस की यह चुप्पी और टालमटोल स्थानीय पुलिस की कार्यप्रणाली और जवाबदेही पर बड़े सवाल खड़े करती है। पीड़िता अब न्याय पाने के लिए थाने के चक्कर लगाने को मजबूर है। ऐसा प्रतीत होता है कि ‘नारी शक्ति मिशन’ केवल दिखावे का ढोल बनकर रह गया है, जबकि वास्तव में महिलाओं को न्याय के लिए उच्च अधिकारियों के हस्तक्षेप की सख्त आवश्यकता है।
