यज्ञ पर्यावरण को शुद्ध रखने का उत्तम साधन: आचार्य विवेक

फर्रुखाबाद, समृद्धि न्यूज। मेला रामनगरिया के वैदिक क्षेत्र में कल्पवासियों को यज्ञ के वैज्ञानिक महत्व के विषय में विस्तार से बताया गया। आचार्य विवेक रीबन ने कहा कि यज्ञ पर्यावरण को शुद्ध रखने का उत्तम साधन है। यज्ञ की प्रक्रिया हमारे पूर्वजों की देन है। हमारे पूर्वज नित्य प्रति यज्ञ किया करते थे। रामायण में एक वृतांत प्राप्त होता है कि जिस समय राम-लक्ष्मण, सीता वनवास काट रहे हैं एक स्थान से दूसरे स्थान की तरफ जाते हुए लक्ष्मण ने राम को संबोधित करते हुए कहा कि है भैया राम यह आगे मुझे धुयें का पहाड़ सा दिखाई दे रहा है यह क्या है। इस बात को सुनकर के राम ने प्रति उत्तर में कहा भैया लक्ष्मण यह प्रयाग नगरी है और इस प्रयाग नगरी के अंदर ऋषि महर्षि निवास करते हैं।

वह प्रतिदिन इतने बड़े पैमाने पर यज्ञ करते हैं कि उसका धुंआ आपको यह पर्वत के रूप में नगरी के बाहर दिखाई दे रहा है। इतने वृतांत से यह पता चलता है कि यज्ञों का प्रचलन हमारे देश में मर्यादा पुरुषोत्तम राम के समय बहुत बड़े पैमाने पर था। भगवान कृष्ण ने भी अपने जीवन में यज्ञ किया। राजेश आर्य, धनीराम बेधडक़ व उदिता आर्या ने यज्ञ महिमा के गीत सुनाकर श्रद्धालुओं को यज्ञ करने का संकल्प कराया। कार्यक्रम में हरिओम शास्त्री, स्वामी देवानंद, राजकुमार आर्य, उत्कर्ष आर्य, प्रशांत आर्य, शिशुपाल आर्य, लालू, रेनू आर्या, अमृता आर्या आदि उपस्थित रहे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *