फर्रुखाबाद, समृद्धि न्यूज। आर्य प्रतिनिधि सभा के तत्वावधान में मेला श्रीरामनगरिया में चल रहे वैदिक क्षेत्र में चरित्र निर्माण शिविर में प्रतिदिन की भांति यज्ञ संपन्न हुआ। उपनयन संस्कार का कार्यक्रम हुआ। जिसमें चेतराम और रामजी आदि के साथ अन्य ब्रह्मचारियों का उपनयन संस्कार किया गया। यज्ञोपरान्त यज्ञ के ब्रह्मा आचार्य चन्द्रदेव शास्त्री ने कहा कि यज्ञोपवीत विद्या का चिन्ह है। देवऋण, ऋषि ऋण, पितृ ऋण से उऋण होने का संकेत यज्ञोपवीत के तीन धागे करते हैं। यज्ञोपवीत परम पवित्र है जो मनुष्य के जीवन को पवित्र बनाता है। यज्ञोपवीत को रक्षासूत्र भी कहा जाता है जो हमारी पग-पग पर रक्षा करता है। शिखा और सूत्र ये दो हमारी पहचाने थीं, लेकिन आज पाश्चात्य सभ्यता के प्रभाव के कारण गले में यज्ञोपवीत और सर पर शिखा दिखाई नहीं देती। पण्डित धर्मवीर शास्त्री ने कहा कि धर्मात्मा व्यक्ति के ऊपर परमात्मा की विशेष कृपा होती है। कु0 उदिता आर्या ने प्रभुभक्ति भजनों से श्रोताओं को मन्त्र मुग्ध कर दिया। पण्डित रामवीर आर्य, हरिदेव आर्य ने भी मधुर भजन सुनकर सन्मार्ग में चलने की प्रेरणा दी। संचालन करते हुए पण्डित सन्दीप आर्य ने बताया करें योग रहें। सभा में उत्कर्ष आर्य, उदयराज आर्य, रत्नेश द्विवेदी, उपासना कटियार आदि उपस्थित रहे।

