
फर्रुखाबाद, समृद्धि न्यूज। प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय जटवारा जदीद अंगूरी बाग द्वारा रतन कोल्ड स्टोर कादरी गेट में श्रीमद् भागवत ज्ञान कथा राजयोगिनी ब्रह्माकुमारी दीपा बहन ने समय चक्र भविष्य दर्शन पर गीता के गुण रहस्यों द्वारा प्रवचन किया। कालचक्र का नियम है जो जैसा कर्म करेगा उसका वैसा फल भोगना पड़ेगा। परमात्मा अभी इस धरा पर पढ़ाने के लिए आया हुआ है, जब कोई नजर नहीं आता है, तब परमात्मा नजर आता है मंत्र को सीखना है, लेकिन हमें करके दिखाना है।
मनुष्य आत्माओं अपने जीवन को देखो कालचक्र 5000 वर्ष का है। परमात्मा इस समय आकर सतयुग में रहने वाली आत्माओं को तैयार कर रहे है। आत्माएं स्वर्ग में बसती हैं, जब नीचे उतरते हैं तो कला, कम होती हैं। पूर्णि आत्माएं स्वर्ग में निवास करते हैं। जब नीचे उतरते हैं तो मांगने वाले बन जाते हैं। संगम पर एक बार ब्राह्मण धर्म की स्थापना परमात्मा कर रहे हैं। परमात्मा इस धरा पर आ चुका है उसे प्यार से हम बाबा कहते हैं। परमात्मा से संबंध बाबा का है, राम जैसी मर्यादा को जीवन में लाना बहुत जरूरी है। गीता के अध्याय 7 के 17वें श्लोक में जो हो रहा है, वह अच्छा जो होगा, वह भी अच्छा होगा। इसलिए हमें चिंता करने की आवश्यकता नहीं है। देवता 16 कला संपूर्ण है। चारों युग बराबर है कार्य व्यवहार के कारण कलयुग का समय अधिक दिखाया गया है। राजयोगिनी ब्रह्माकुमारी अलका दीदी कानपुर ने कहा विकृतियों अनैतिकता चारों तरफ फैली हुई है, ऐसे समय कृष्ण का जन्म हुआ परमात्मा को स्वयंभू के नाम से जानते हैं। परमात्मा वास्तव में हमारे साथ है, निराकार ईश्वर की हम सभी संतान हैं। परमात्मा सर्वज्ञ है, हम भी सृष्टि को आदि मध्य अंत को जान सकते हैं। इस गीता महाकाव्य को शांत चित्त होकर श्रवण करें कथा व्यास बहन दीपा दीदी के ज्ञान अमृत पान करें। अखिलेश मिश्रा, सुरेंद्र पांडे, अरविंद दीक्षित, बृजकिशोर सिंह, देव कुमार शर्मा, रंजना शर्मा ने पुष्प गुच्चो एवं शाल ओड़ाकर स्वागत किया। कोमल, प्रियंका ने समय की पुकार एवं समय का पंछी उड़ता जाए, गीत पर नृत्य प्रस्तुत किया। कुमारी प्रियंका ऐसी लागी लगन मीरा हो गई मगन पर नृत्य प्रस्तुत किया। दतिया से आये नीलेश भाई ने संचालन किया। सुआलाल मिश्रा ने मंत्र उच्चारण के सहित परमात्मा शिव का पूजन अर्चन करवाया। इस अवसर पर हरि, शरद, जानवी, विजय शंकर, मोहित, अरविंद, अविनाश, सुधीर, सत्येंद्र, हेमचंद, गंगा सिंह, गीता, प्रवीण, गोलू, सुदामा, ज्योति, हुकुम सिंह आदि मौजूद रहे।
