फर्रुखाबाद, समृद्धि न्यूज। दहेज हत्या के मामले में एडीजे प्रथम कोर्ट के न्यायाधीश विष्णु चंद्र वैश्य ने आरोपी पति रीतेश को दोषी करार देते हुए सात वर्ष के कारावास व 25 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया।
विगत वर्ष 7 जुलाई 1995 को रविचरन पुत्र रामकिशोर निवासी पाली जनपद हरदोई ने पुलिस को दी तहरीर में दर्शाया था कि चार वर्ष पूर्व मैं अपनी पुत्री नीलम का विवाह रीतेश कुमार उर्फ बबलू पुत्र भोलानाथ निवासी मोहल्ला हरभगत कोतवाली फर्रुखाबाद के साथ किया था। 7 जुलाई 1995 को पड़ोसी बृजेश कुमार द्वारा पता चला कि पुत्री नीलम को उसके ससुरालियों ने जहर देकर मार डाला है। हम लोग फर्रुखाबाद पहुंचे तो देखा कमरे में मेरी पुत्री मरी पड़ी थी। ससुरालीजन अतिरिक्त दहेज की मांग कर उसका उत्पीडऩ करते थे। एक वर्ष मैंने रंगीन टीवी के लिए दस हजार रुपये दिये थे। कुछ दिन बाद आरोपी पति मेरी पुत्री को घर छोड़ गया। जब मैं अपनी पुत्री को ससुराल छोडऩे गया तो रीतेश के पिता व रीतेश भाई मनोज ने एक बाइक की मांग की। मैंने असमर्थता जतायी। दो हफ्ते के करीब भोलानाथ, पुत्री का पति रीतेश, मनोज, सास ने मिलकर मेरी पुत्री को मार डाला। पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर लिया था। विवेचक ने न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल कर दिया था। मुकदमा विचारण के दौरान ससुर भोलानाथ व मनोज की मौत हो गई। बचाव पक्ष व जिला शासकीय अधिवक्ता अनिल बाजपाई, दीपिका कटियार, तेज सिंह राज की कुशल पैरवी के आधार पर एडीजे प्रथम कोर्ट के न्यायाधीश विष्णु चंद्र वैश्य ने आरोपी पति रीतेश को धारा 498ए में तीन वर्ष के सश्रम कारावास व 25हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया। अदा न करने पर छह माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। धारा 304बी के तहत सात वर्ष का कारावास से दंडित किया। वहीं सास आनन्द कुमारी को दोषमुक्त कर दिया।
दहेज हत्या में पति को सात वर्ष का कारावास, सास दोषमुक्त
