आत्म विज्ञान से परमात्मा का ज्ञान होता है: डॉ0 मनमोहन

फर्रुखाबाद, समृद्धि न्यूज। श्रीराधा श्याम शक्ति मन्दिर (लोहाई रोड) पर डॉक्टर मनमोहन गोस्वामी ने कृष्ण भक्त निताई गौर हरी की परम वात्सल्य कृष्ण भक्त पश्चिमी बंगाल के नदिया जिले की निवासनी चन्द्र शशि गोस्वामी और सखा भाव के कृष्ण भूलगोपेश्वर गोस्वामी (वृन्दावन) अपने ठाकुर जी की सेवा में उनकी लीलाओं उनकी सेवा कार्य में आध्यात्मिक अनुभूतियों का वर्णन किया।
डॉ0 मनमोहन गोस्वामी ने कहा कि सनातन धर्म में मूर्ति की उपासना, इसकी साधना में मूर्ति विज्ञान का आध्यात्मिक ज्ञान चिंतन होता है। ईश्वर की अपार शक्ति जो प्रकृति के कण. कण में व्याप्त है उसकी सृष्टि प्रकृति की पंचतत्व से बनी मिट्टी के द्वारा निर्माण उसकी अद्भुत लीला है। सब कुछ प्रकृति के पंचतत्व से बना है। अध्यात्म के क्षेत्र में चिन्मय विज्ञान का चिर विज्ञान की परिभाषा में आत्मा परमात्मा और उसकी सृष्टि में भौतिक विज्ञान में हमारा शरीर पंचतत्वों से बना है जो ईश्वर द्वारा है उसमें आत्मा निवास करती है वह परमात्मा का परम अंश है। मानव द्वारा मूर्ति निर्माण और उसमें प्राण प्रतिष्ठा से मूर्ति चिन्मय हो जाती है जो सावकार भक्ति से निराकार और निराकार से पर ब्रह्म बनकर कण-कण में उसकी शक्ति व्याप्त हो जाती है। यह हमारा आध्यात्मिक विज्ञान कहता है मनुष्य भौतिक विज्ञान में रहता है आध्यात्म विज्ञान के द्वारा आत्म ज्ञान और आत्म विज्ञान से परमात्मा का ज्ञान होता है। ईश्वर त्रिकाल दशी है। वह सर्वत्र रहता है। वह प्रतिदिन हमारे आसपास रहता है। हम अपनी आत्मा की आवान सुनें। उसके दर्शन अवश्य होगें। मूर्ति विज्ञान में श्री विगृह में साकार से जिसका और निराकार से साकार के रूप में ईश्वर हमारे सामने साधन उपासना, श्रद्धा, प्रेम भाव की भक्ति में हमारे पास आता है। दर्शन देता है और कल्याण करता है। कथा का विराम आरती प्रसाद के साथ हुआ। कार्यक्रम संयोजक सुरेंद्र कुमार सफ्फड़ ने सभी भक्तों का स्वागत किया। कार्यक्रम का संचालन ब्रजकिशोर सिंह किशोर ने किया।

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