फर्रुखाबाद, समृद्धि न्यूज। म्युनिसिपल इंटर कालेज के शिक्षक विश्वप्रकाश दीक्षित ने बीते ३ अगस्त को पुलिस अधीक्षक को प्रार्थना पत्र देकर प्रवक्ता प्रदीप कुमार जायसवाल पर जानलेवा हमले का आरोप लगाते हुए कार्यवाही की मांग की थी। शिक्षक विश्व प्रकाश ने बताया कि मैं ३ अगस्त को कक्षा ११ का अंगे्रजी का चौथा पीरिएड रुम ०४ में पढ़ा रहा था, तभी प्रवक्ता प्रदीप जायसवाल अचानक आये और अभद्रता करते हुए मेरी गर्दन पकडक़र मेरे साथ मारपीट की और मुझे धमकी दी। वहीं विद्यालय के प्रवक्ता प्रदीप जायसवाल ने भी पुलिस अधीक्षक को प्रार्थना पत्र दिया था। जिसमें उन्होंने दर्शाया था कि मेरी नियुक्ति विद्यालय में २००५ में हुई थी। विद्यालय में प्रवक्ता पद रिक्त चल रहा था। विद्यालय प्रशासन ने वरिष्ठता के आधार पर प्रवक्ता पद पर २९ जून २०१३ को प्रोन्नति कर दिया। जिसका अनुमोदन संयुक्त शिक्षा निदेशक कानपुर व मण्डल चयन समिति ने २४ जून २०१३ को कर दिया। इसी के चलते विश्वप्रकाश द्वारा विभिन्न शिकायतों के बिन्दुओं पर प्रबधंक व जिला विद्यालय निरीक्षक एवं संयुक्त शिक्षा निदेशक कानपुर ने विश्व प्रकाश की शिकायतों को अमान्य कर दिया। परन्तु सहायक अध्यापक विश्वप्रकाश उच्च न्यायालय में याचिका दायर की। जिसे उच्च न्यायालय प्रयागराज ने खारिज कर दिया।
२९ जून २०१३ से अध्यतन प्रवक्ता पद पर प्रदीप जायसवाल कार्य कर रहे है। उसी से नाराज होकर विश्व प्रकाश चतुर्वेदी ने दर्शाया कि मैं कानपुर का रहने वाला हूं। प्रोन्नति हमारी ही होगी, मैं तूझे नौकरी नहीं करने दूंगा। जिसकी शिकायत प्रदीप जायसवाल द्वारा पुलिस अधीक्षक से की गई थी। दोनों लोगों के प्रार्थना पत्रों की जांच की गई और विद्यालय में ना ही कोई सीसीटीवी कैमरे पर मारपीट का सबूत मिला और न ही किसी ने अपने जुबानी बयान में मारपीट का जिक्र किया।
पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर जांच की गई। जांच में शिक्षक विश्वप्रकाश दीक्षित जो मारपीट के आरोप लगाये गये वह निराधार निकले। पूर्व में प्रवक्ता पद को लेकर हुए विवाद के चलते शिक्षकों में आपसी विवाद चल रहा था। प्रधानाचार्य ने भी प्रदीप जायसवाल को नोटिस देकर स्पष्टीकरण मांगा था। अंग्रेजी प्रवक्ता प्रदीप जायसवाल ने जांच के दौरान सहयोग किया। उन्होंने बताया कि मेरी प्रतिष्ठा को धूमिल करने व मेरे प्रवक्ता पद की प्रोन्नति से खिन्न होकर मेरे खिलाफ नाराज शिक्षक ने जानलेवा हमला करने का षड्यंत्र रचा, जो जांच के दौरान झूठा निकला। प्रदीप जायसवाल ने बताया कि सच कभी छिपता नहीं।
