न्यायालय ने पुलिस महानिदेशक को भेजा पत्र
फर्रुखाबाद, समृद्धि न्यूज। दहेज हत्या के मामले में अपर जनपद एवं सत्र न्यायाधीश/विशेष न्यायाधीश ई.सी. एक्ट राकेश कुमार प्रथम ने विवेचक के विरुद्ध कार्यवाही करने के लिए पुलिस महानिदेशक लखनऊ पत्र भेजा।
वर्ष २०१८ में धारा-४९८ए, ३०४बी एवं ३/४ दहेज अधिनियम के तहत नवाबगंज थाने अभियुक्त वैभव उर्फ जैकी के विरुद्ध मामला दर्ज किया गया था। दहेज हत्या के मामल में विवेचना तत्कालीन सीओ अखिलेश राय द्वारा विवेचना की गयी थी व नक्शा नजरी एवं केस डायरी के पांच पर्चे काटे गये, लेकिन दौरान जिरह यह बात साबित हुई कि घटनास्थल का नक्शा नजरी बनाते समय जो लाइन खींची गयी हैं और जो बातें लिखी गयी हैं, उसको भी विवेचक द्वारा अपने हस्तलेख में नहीं लिखा गया है, बल्कि अपने पेशकार सतेंद्र यादव के द्वारा उपरोक्त कार्य किया जाना बताया है। विवेचना के दौरान इनके द्वारा काटे गये पर्चों में कोई भी पर्चा इनके हस्तलेख में नहीं है, बल्कि यह सभी पर्चे पेशकार सतेंद्र यादव के हस्तलेख में है। इस मामले में मृतका की मृत्यु गले में फंदा लगाकर छत के कुंडे में लटकाने से हुई थी। विवेचक घटनास्थल पर गये थे, परन्तु उनके द्वारा विवेचना में यह तथ्य नहीं लाया गया कि मृतका जिस कमरे के छत के कुंडे में लटकी थी, उस कमरे का दरवाजा अंदर से बंद था या बाहर से, अगर अंदर से बंद था, तो उस दरवाजे को तोडक़र खोला गया या कुंडी तोडक़र। मृतका रस्सी के फंदे से लटकी थी या कपड़े के फंदे से लटकी थी। इस तरह की कोई भी रस्सी या कपड़े न तो विवेचक द्वारा बरामद किया गया और न ही विवेचना में यह पता लगाया गया कि फंदा रस्सी का था या कपड़े का। अभियोजन अपना पक्ष युक्तियुक्त संदेह से परे साबित करने में सफल नहीं हो सकते हैं। दूसरी तरफ विवेचक क्षेत्राधिकारी राजवीर सिंह जो इस मामले के द्वितीय विवेचक हैं उन्होंने इस मामले में तीन अभिुक्त पति, सास, ससुर के विरुद्ध प्रस्तुत किया है, लेकिन उन्होंने भी जिरह के दौरान यह कहा है कि उनके द्वारा जो पर्चे काटे गये हैं वह उनके हस्तलेख में नहीं हैं, बल्कि पेशकार ने लिखे हैं। इसके अलावा इस साक्षी के द्वारा जिरह में यह बात कही गयी कि मेरे द्वारा की गयी विवेचना में यह पुष्टि की गयी है कि मृतका प्रीती की मृत्यु उसके द्वारा फांसी लगाने से हई है। अगर ऐसा है तो धारा ३०४बी के अंतर्गत अभियुक्त के विरुद्ध क्या आरोप पत्र प्रस्तुत किया गया, इसका भी कोई कारण नहीं बताया गया। विवेचक द्वारा विवेचना में कोई ुरुचि नहीं ली गयी, बल्कि उनके द्वारा मात्र विवेचना में खानापूर्ति की गयी है। ऐसी स्थिति में न्यायालय ने पुलिस महानिदेशक से अनुरोध किया है कि दहेज मृत्यु के संबंध में होने वाली विवेचनाओं का समुचित पर्यवेक्षण कराकर उच्च स्तरीयविवेचनायें किये जाने के संदर्भ में विवेचकों को समुचित दिशा निर्देश जारी करें। जिससे दहेज हत्या के संदर्भ में भविष्य में होने वाली विवेचनायें उच्च स्तरीय हो सके। इस मामले में दोनों विवेचकों द्वारा निश्चित रुप से घोर लापरवाही की गयी है।
