
आयुर्वेद जगत में फर्रुखाबाद जनपद का अति महत्वपूर्ण स्थान: डॉ0 गंगासहाय राजपूत
नव प्रवेशित बैच 2023 के विद्यार्थियों के शिक्षोपनयन संस्कार का तीसरा दिन
फर्रुखाबाद, समृद्धि न्यूज। वयोवृद्ध आयुर्वेदाचार्य डॉ0 गंगा सहाय राजपूत ने आज यहां कहा कि आयुर्वेद विज्ञान जगत में फर्रुखाबाद जनपद का बहुत ही महत्वपूर्ण स्थान है। उन्होंने बताया कि महर्षि आचार्य चरक ने चरक संहिता लिखने की शुरुआत जनपद की ऐतिहासिक नगरी काम्पिल्य (वर्तमान में कंपिल) से की थी।डॉ0 राजपूत मेजर एसडी सिंह पीजी आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज एवं हॉस्पिटल बेवर रोड बघार में नवप्रवेशित बैच 2023 के छात्र-छात्राओं के शिक्षोपनयन संस्कार कार्यक्रम में संबोधित कर रहे थे। छात्र-छात्राओं को सम्बोधित करते हुए उन्होंने कहा कि आयुर्वेद जगत में फर्रुखाबाद का बहुत ही महत्वपूर्ण स्थान है। आप लोग बहुत भाग्यशाली हैं जो पावन नगरी फर्रुखाबाद में रहकर आयुर्वेद विज्ञान का ज्ञान प्राप्त करने आये हैं। उन्होंने कहा कि आयुर्वेद विज्ञान विश्व का सबसे प्राचीन विज्ञान है। आयुर्वेद का मुकाबला आधुनिक विज्ञान कभी नहीं कर सकता। उन्होंने कहा कि एलोपैथ आयुर्वेद विज्ञान पर आश्रित है। इसलिए एलोपैथ आयुर्वेद से बेहतर नहीं हो सकता। भूतपूर्व चिकित्सा अधिकारी डॉ0 राजपूत ने नव प्रवेशित छात्र-छात्राओं को तमाम आयुर्वेदिक जड़ी बूटियों के बारे में विस्तार पूर्वक जानकारी भी दी। व्याख्यान के अंत में प्राचार्य डॉ0 सुनील कुमार गुप्ता ने डॉ0 राजपूत का शॉल ओढ़ाकर सम्मान किया। इस अवसर पर डॉ0 अंकुर सक्सेना, डॉ0 शिवओम दीक्षित, डॉ0 अरुण कुमार पाण्डेय, डॉ0 मुकेश कुमार विश्वकर्मा भी उपस्थित रहे। इससे पूर्व बैच 2023 के ट्रांजिस्नल कैरीकुलम कार्यक्रम के मोटीवेशन लेक्चर में मंगलवार को नीमा एवं आयुष मेडिकल एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष डॉद रवीन्द्र यादव ने नवप्रवेशित छात्र-छात्राओं का आयुर्वेद से परिचय कराया और आयुर्वेद को पढऩे और सीखने में सहायक महत्वपूर्ण टिप्स दिये। इसी प्रकार बुधवार को आयुर्वेदिक चिकित्सा अधिकारी डॉ0 नवनीत गुप्ता ने नवप्रवेशित छात्र-छात्राओं को मोटीवेट किया। डॉ0 गुप्ता ने कहा कि मेजर एसडी सिंह पीजी आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज में आयुर्वेद को पढऩे और समझने के लिए सर्वोत्तम माहौल है।
