डीएम के आदेश पर तीन माह पूर्व कार्यालय से हटाया गया था
फर्रुखाबाद, समृद्धि न्यूज। अधिकारियों के फर्जी हस्ताक्षर व मोहर से प्रतिबंधित क्षेत्र का नक्शा मोटी रकम लेकर बनाकर देने वाले लिपिक के विरुद्ध कार्यालय नियत प्राधिकारी विनियमित क्षेत्र के अवर अभियंता डीके सिंह की तहरीर पर पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी।
फतेहगढ़ कोतवाली में दी गई तहरीर में दर्शाया है कि गौरहरि अग्रवाल पुत्र श्रीराम अग्रवाल निवासी सेठ गली हुकुमचंद फर्रुखाबाद द्वारा वक्फ संपत्ति पर अनाधिकृत रूप से कब्जा कर मैरिज होम व सिनेमा आदि बनाने के संदर्भ में शिकायत 18 सितंबर 2019 में अपर आयुक्त राज्य कर उत्तर प्रदेश द्वारा की गई थी। 1 नवंबर 2022 में उपरोक्त शिकायत पर आख्या उपलब्ध कराने हेतु पत्र प्रेषित किया गया। उपरोक्त क्रम में गौरहरि अग्रवाल द्वारा मानचित्र संख्या 266, 5 अप्रैल 2018 नियत प्राधिकारी विनियमित क्षेत्र फर्रुखाबाद के समक्ष प्रस्तुत किया गया। जिसमें प्रथम तल पर अच्छादित क्षेत्रफल 249.६० वर्ग मीटर जिसमें दो हाल, लॉवी, कैंटीन इत्यादि का 26 अगस्त 2018 को स्वीकृत होना प्रदर्शित किया गया है, लेकिन इस मानचित्र में मास्टर प्लान का पार्ट, लैंड उसे एवं की प्लान प्रदर्शित नहीं किया गया है। यह मानचित्र संख्या २६६ 5 अप्रैल 2018 कार्यालय में अभिलेखों में दर्ज नहीं पाया गया है। गौरहरि अग्रवाल द्वारा इस कथित स्वीकृत मानचित्र को कार्यालय से प्राप्त होना बताया गया है। इस संदर्भ में 18 नवंबर 2023 को दिए गए अपने लिखित बयान में अपने हस्तलेख व हस्ताक्षर में अंकित किया गया है। उक्त मानचित्र लिपिक विनियमित क्षेत्र विदुरपाल सिंह द्वारा दिया गया है प्रथम दृष्टया में मानचित्र की स्वीकृति कूटरचित प्रतीत होना पाया गया है। तत्कालीन अवर अभियंता विपिन चंद्र वर्मा के हस्ताक्षर की पुष्टि भी नहीं हुई है। गौरहरी द्वारा अपराधिक षड्यंत्र के तहत विदुर पाल सिंह लिपिक निवासी अपर दुर्गा कॉलोनी नगला राजन लोको रोड भोलेपुर कोतवाली फतेहगढ़ से मिलकर कूटरिचत अभिलेख तैयार कर उसका उपयोग कर मानचित्र लाभ प्राप्त करने के उद्देश्य धोखाधड़ी कर नियमित अधिकारी के समक्ष मानचित्र प्रस्तुत किया गया है। तहरीर के आधार पर पुलिस ने भू-माफिया गौरहरी व लिपिक विदुर पाल के विरुद्ध धारा 419, 420, 467, 468, 471 के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया है।
फर्जी नक्सा पास कर करोड़ों की सम्पत्ति की है अर्जित
फर्रुखाबाद। लिपिक विदुर पाल लगभग ३० वर्ष से अधिक समय से इसी कार्यालय में कार्यरत है। बीते तीन माह पूर्व कचहरी के निकट एक रेस्टोरेंट के निर्माण को अवैध घोषित कर तत्कालीन नगर मजिस्टे्रट दीपाली भार्गव ने ध्वस्तीकरण का आदेश दिया था। लिपिक विदुर पाल ने आरोपी से मोटी रकम लेकर फर्जी आदेश तैयार कर गिराने पर रोक लगा दी थी। मामला संज्ञान में आने पर जिलाधिकारी ने विदुर पाल को कायमगंज एसडीएम के यहां अटैच कर दिया। यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी विदुर पाल पर कई आरोप लग चुके है। विदुर पाल की मुख्य तैनाती कन्नौज में है। नक्सा बनाने व भवन गिराने व रोंक लगाने जैसे आदेशों को खुद विदुर पाल अधिकारियों के नाम से तैयार कर धन उगाही बड़े पैमाने पर करता आ रहा है। सूत्रों की माने तो करोड़ों की सम्पत्ति अर्जित की है।
