आईपीसी की जगह अब भारतीय न्याय संहिता में दर्ज होगा केस

ये आईपीसी की जगह लेगी। यानी हर पुलिस स्टेशन में केस अब आईपीसी की धाराओं की जगह बीएनएस की धाराओं में दर्ज होगा। नया कानून अपनी नई भाषा और परिभाषा के साथ होगा। नई दिल्ली: 1 जुलाई से दिल्ली समेत पूरे देश का कानून अपनी नई ‘भाषा और परिभाषा’ के साथ सामने होगा।

1 जुलाई से दिल्ली समेत पूरे देश का कानून अपनी नई ‘भाषा और परिभाषा’ के साथ सामने होगा। ब्रिटिश काल में सन 1860 में अंग्रेजों ने अपनी सुविधानुसार जिस IPC (INDIAN PENAL CODE) को लागू किया था। उससे लगभग छुटकारा मिल जाएगा।

BNS में अब इन धाराओं से पहचाने जाएंगे ‘सीरियस क्राइम’

  1. रेप और पॉक्सो- बीएनएस 65 और 4 पॉक्सो (कम से 20 वर्ष की सजा या आजीवन कारावास, जुर्माना)
  2. हत्या- बीएनएस 103 (1)- मृत्युदंड या आजीवन कारावास
  3. मॉब लिंचिंग- बीएनएस 103 (2)- पांच से अधिक लोगों का ग्रुप मिलकर जाति, धर्म, संप्रदाय, भाषा को लेकर हत्याएं करता है, ऐसे ग्रुप के हर एक सदस्य को दोष साबित होने पर मृत्युदंड या आजीवन कारावास की सजा।
  4. किडनैपिंग- बीएनएस 137- कम से कम सात साल और इससे अधिक की सजा, जुर्माना भी
  5. फिरौती के लिए किडनैपिंग- बीएनएस 140 (2) मृत्युदंड और आजीवन कारावास की सजा
  6. स्नैचिंग- बीएनएस 304 – कम से कम तीन साल की सजा और जुर्माना
  7. दंगा- बीएनएस 189/190/191/192/324/117/57/61/3(5)- कम से कम 7 साल की सजा
  8. दहेज के लिए हत्या- बीएनएस 80 (2) – कम से कम सात साल और अधिकतम आजीवन कारावास की सजा
  9. एक्सिडेंट में मौत- बीएनएस 106(2)- अधिकतम 10 साल की सजा और जुर्माना
  10. हत्या की कोशिश- बीएनएस 109- मृत्युदंड या आजीवन कारावास

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