इंदौर. लड़की जब शादी करती है तो वो हमेशा सोचती है कि आखिरी वक्त तक उसकी मांग खाली न रहे. मध्य प्रदेश के इंदौर में भी कुछ ऐसा ही हुआ, जिसे जानकर शायद आपकी भी आंखें भर आएं. पति ने पत्नी की मांग में सिंदूर तो भरा, लेकिन उनका साथ हमेश-हमेशा के लिए टूट गया. देशभर में ब्रेन डेड की घटनाएं तेज सी बढ़ रही हैं. ब्रेन डेड की स्थित में अंग दान करके एक से ज्यादा लोगों की जिंदगी को बचाया जा सकता है. ऐसा ही एक ताजा मामला मध्य प्रदेश के इंदौर जिले से सामने आया है. यहां एक पति ने पत्नी के ब्रेन डेड होने के बाद उसके अंग डोनेट कर दिए. इतना ही नहीं अंग दान करने से पहले पति ने पत्नी की मांग में सिंदूर भर के अपनी ओर से आखिरी विदाई दी. इससे पहले भी इंदौर में कई लोगों को अंग डोनेट होने के बाद नई जिंदगी मिल चुकी है. शाजापुर में रहने वाले भूपेंद्र और उनकी पत्नी मनीषा का पिछले दिनों एक एक्सीडेंट हो गया था. इस एक्सीडेंट में पति-पत्नी दोनों गंभीर रूप से घायल हो गए थे. वहीं, इलाज के दौरान डॉक्टरों ने पत्नी मनीषा को ब्रेन डेड घोषित कर दिया. जिस दौरान डॉक्टरों ने मनीषा को ब्रेन डेड घोषित किया उस समय पति भूपेंद्र का भी अस्पताल में इलाज चल रहा था. ब्रेन डेड की जानकारी होते ही पूरे परिवार में सन्नाटा पसर गया. परिवार ने हिम्मत बांधते हुए मनीषा के अंग दान करने का निर्णय लिया और उन्होंने इस संबंध में इंदौर की अंगदान समिति के जीतू बागवानी और अन्य लोगों से संपर्क किया. इसके बाद जरूरतमंद लोगों तक अंग पहुंचने की व्यवस्था की गई. वहीं, इस दौरान पति ने पत्नी की मांग में सिंदूर भर के और बिंदी लगाकर नम आंखों से विदाई दी. यह नजारा देखते ही अस्पताल में मौजूद सभी लोग काफी भावुक हो गए. हर कोई शख्स अपने आंसू नहीं रोक गया. सभी की आंखें नम हो गईं.
मौत के बाद दिया कई लोगों को जीवनदान
ग्रीन कॉरिडोर बनाकर मनीषा की किडनी दो लोगों को डोनेट की गई है. वहीं आंखें एक व्यक्ति को डोनेट की गई है. इंदौर में ऐसा पहली बार नहीं हुआ है. इससे पहले भी अंग दान करके इंदौर में कई लोगों की जान बची है. मनीषा मौत के बाद भी कई लोगों को जीवनदान दे गई हैं.
सड़क हादसे में घायल हो गए थे पति-पत्नी
मध्य प्रदेश के इंदौर में एक सड़क हादसा हुआ था. हादसे में शाजापुर के रहने वाले भूपेंद्र राठौर और उनकी पत्नी मनीषा बुरी तरह जख्मी हो गए थे. दोनों को इलाज के लिए इंदौर के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था. अस्पताल में भी पति ने पत्नी का साथ नहीं छोड़ा. दोनों के बेड पास-पास ही थे. परिवार पर दुखों का पहाड़ तक टूट पड़ा जब डॉक्टरों ने पत्नी मनीष को ब्रेन डेड डिक्लेयर कर दिया.
अपने प्यार और श्रद्धा का अद्वितीय उदाहरण पेश किया
अस्पताल में दोनों के बिस्तर पास-पास थे, लेकिन मनीषा की हालत बिगड़ने लगी. डॉक्टरों ने मनीषा को ब्रेन डेड घोषित कर दिया. इस घातक स्थिति में भी भूपेंद्र ने पत्नी के प्रति अपने प्यार और श्रद्धा का अद्वितीय उदाहरण पेश किया. जब डॉक्टरों ने अंगदान करने की सलाह दी, तो मनीषा के परिजनों ने अंगदान का निर्णय लिया. किडनी, लीवर और आंखें दान करने के लिए ग्रीन कॉरिडोर तैयार कर इन अंगों को अन्य अस्पतालों में भेजा गया.
मानवता और समर्पण की एक नई मिसाल स्थापित की है
मनीषा के अंगों को दान करने का फैसला एक बड़ा कदम था, जिससे अन्य लोगों को जीवन मिल सकता था. इस त्यागपूर्ण कार्य ने समाज में मानवता और समर्पण की एक नई मिसाल स्थापित की है. इस मार्मिक दृश्य ने यह सिद्ध कर दिया कि प्यार सच्चा और शाश्वत होता है, और उसकी कोई सीमा नहीं होती, चाहे वह जीवन हो या मृत्यु.
